कासगंज। पटियाली क्षेत्र के नगला नरपत गांव के बाशिंदों का इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि आजादी के 77 साल बाद उन्हें बिजली की सुविधा नसीब नहीं है। यही कारण है कि इस गांव के लोग आज भी बल्ब की रोशनी की बाट जोह रहे हैं। ग्रामीण रात में दीपक जलाकर घरों में रोशनी करते है। विद्युत निगम ने इस गांव के दलितों के साथ सौतेला व्यवहार किया है। वर्ष 2016 में जब गांवों में विद्युतीकरण का कार्य चल रहा था, उस समय भी इस दलित बस्ती में खंभे ही नहीं लगाए गए। गांव के अन्य घरों को रोशन देखकर इस गांव के बांशिंदों के मन में छटपटाहट होती है।
पटियाली तहसील क्षेत्र से करीब 16 किमी दूर गंगा की खादर स्थित ग्राम पंचायत सनौढ़ी के नगला नरपत की आबादी लगभग 750 है। गांव में वर्ष 2016 में विद्युत निगम द्वारा विद्युतीकरण कराया गया, लेकिन दलित बस्ती में कर्मियों ने खंभे नहीं लगाए। इससे गांव के 35 परिवार के 200 सदस्य आज भी दीपक की लौ की रोशनी में जीने को मजबूर हैं।
यूं कहना गलत नहीं होगा कि आजादी के 77 साल बाद भी विकास का दांवा नगला नरपत गांव की दशा तार तार करता है। इस गांव के दलित दीपक जलाकर घरों को रोशन ही नहीं करते बल्कि जीवन यापन करते हैं। बात करने पर ग्रामीण वीरेंद्र, प्रेमचंद्र, रघुवीर, अशोक, मकरंदी, विजय सिंह बताया कि कई बार इस संबंध में अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं हुआ। घरों तक बिजली नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने जिलाधिकारी से समस्या के समाधान कराए जाने की मांग की।
बिना समाधान के ही कर दिया ऑनलाइन शिकायत का निस्तारण
नगला नरपत के ग्रामीणाें ने गांव में बिजली के खंभे लगाने के लिए आईजीआरएस व एक्स पर पोस्ट के माध्यम से भी समस्या दर्ज कराई। ग्रामीण वीरेंद्र व किशनपाल ने बताया कि अधिकारियों ने खेल करते हुए समस्या का समाधान किए बिना ही उनकी ऑनलाइन शिकायत का निस्तारण दिखा दिया। जबकि गांव में बिजली आज तक नहीं आई है।
- गांव में विद्युतीकरण के लिए प्रस्ताव बिजनेस प्लान में भेज दिया है। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर गांव में कार्य कराया जाएगा। - एके सविता, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण