मैनपुरी। लगभग तीन वर्ष पूर्व पंचायत राज विभाग में हुए कूड़ेदान फर्जीवाड़े की विजिलेंस जांच एक बार फिर तेज हो गई है। बृहस्पतिवार को मैनपुरी पहुंचे विजिलेंस इंस्पेक्टर ने दिनभर जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय में अभिलेख खंगाले। जांच से संबंधित कई अभिलेख डीपीआरओ से प्रमाणित कराने के बाद जांच अधिकारी ने अपने पास रख लिए।
वर्ष 2019 में जिले की 552 ग्राम पंचायतों में लगे कूड़ेदानों के नाम पर हुए घोटाले की जांच विजिलेंस आगरा कर रही है। कई बार जांच से संबंधित अभिलेखों व बयान दर्ज करने के लिए जांच अधिकारी मैनपुरी आ चुके हैं। एक बार फिर बृहस्पतिवार को जांच अधिकारी विजिलेंस इंस्पेक्टर यतेंद्र कुमार विकास भवन पहुंचे। उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में संपर्क कर पटल सहायक व अधिकारियों से जांच में आवश्यकता अनुसार अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए कहा।
दिन भर जांच अधिकारी व कर्मचारी मामले से संबंधित फाइलों को पलटने में लगे रहे। इस दौरान कई जरूरी अभिलेखों की प्रमाणित प्रति जांच अधिकारी ने अपने पास रख ली। देर शाम तक जांच अधिकारी अभिलेख खंगालने में जुटे रहे। इससे पूर्व में भी कई बार कूड़ेदान क्रय और भुगतान के साथ ही शौचालय निर्माण के संबंध में सभी अभिलेख विजिलेंस तलब कर चुकी है। विजिलेंस जांच एक बार फिर शुरू होने से विभाग से लेकर पंचायतों तक खलबली मच गई है।
तत्कालीन डीपीआरओ भी रहे मौजूद
विजिलेंस इंस्पेक्टर यतेंद्र कुमार दोपहर दो बजे के करीब जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह भी कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने भी कई अभिलेख जांच अधिकारी को उपलब्ध कराए।
ये था मामला
जिले में वर्ष 2019 में ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ेदान लगवाए गए थे। प्रत्येक कूड़ेदान के लिए 12 हजार रुपये का भुगतान किया गया। शिकायत पर हुई जांच में पता चला कि कूड़ेदानों की कीमत बमुश्किल चार हजार रुपये थी। विभागीय जांच में पुष्टि के बाद तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह को शासन ने निलंबित कर दिया था। तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी कपिल सिंह की संस्तुति पर विजिलेंस जांच शुरू हुई थी, जो अब तक चल रही है।
मामला मेरी तैनाती से पूर्व का है। विजिलेंस द्वारा कूड़ेदान लगाने के मामले में जांच की जा रही है। बृहस्पतिवार को जांच अधिकारी कुछ अभिलेखों के संबंध में आए थे। उनके द्वारा मांगे गए अभिलेखों की प्रमाणित प्रति उपलब्ध करा दी गई है।
-रोहित कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी।