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आगरा: गलत तथ्यों के साथ वायरल किया गया वीडियो, जांच में सामने आया सच, डीएम ने दी नसीहत

Sat, 08 May 2021 02:22 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

जिलाधिकारी ने अपने ट्विटर हैंडल पर जांच रिपोर्ट साझा करते हुए लिखा कि किसी प्रकार की घटना के तथ्य/वीडियो को सोशल मीडिया पर लिखने से पहले दोनों पक्ष की वास्तविकता का जानना जरूरी होता है।  
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वीडियो से ली गई तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में अप्रैल के आखिरी सप्ताह में इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ लोग पुलिस के सामने ऑक्सीजन सिलिंडर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। पीपीई किट पहने एक युवक गिड़गिड़ा रहा है। वीडियो के आधार पर पुलिसकर्मियों पर ऑक्सीजन सिलिंडर छीनने का आरोप लगा था। मजिस्ट्रियल जांच में यह आरोप गलत साबित हुआ है। इस पर जिलाधिकारी ने ऐसे वीडियो वायरल करने वालों को नसीहत दी है। 

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28 अप्रैल को वायरल हुआ वीडियो उपाध्याय अस्पताल के बाहर का है। वीडियो वायरल होने के बाद एडीजी राजीव कृष्ण ने जांच के निर्देश दिए थे। एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद इसकी जांच कर रहे हैं। इधर, जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने भी इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए थे। शुक्रवार को जिलाधिकारी ने अपने ट्विटर हैंडल पर जांच रिपोर्ट साझा की। जिसके अनुसार यह वीडियो गलत तथ्यों के साथ प्रसारित किया गया था।

26 अप्रैल की रात का है वीडियो 
जांच रिपोर्ट के अनुसार उपाध्याय अस्पताल के बाहर पुलिस के सामने गिड़गिड़ाता युवक अंश गोयल है। उपाध्याय अस्पताल में अंश की मां ऊषा गोयल भर्ती थीं। 26 अप्रैल की रात उनका ऑक्सीजन स्तर घट रहा था। अंश ने एंबुलेंस चालक की मदद से ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था कर ली, लेकिन रेगुलेटर नहीं मिला। इसके लिए वह वहां खड़े पुलिसकर्मियों से व्यवस्था कराने के लिए कह रहा था। इसी दौरान उसके पास दो युवक खाली सिलिंडर भरवाने के लिए ले जा रहे थे।

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जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि अंश गोयल और उनके भाई अनमोल ने कहा है कि उनसे किसी ने सिलिंडर नहीं छीना और न ही पुलिसकर्मी वीआईपी के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर ले जा रहे थे। उपाध्याय अस्पताल के संचालक डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि अस्पताल में ऊषा गोयल को ऑक्सीजन व अन्य उपचार मुहैया कराया गया था, लेकिन अधिक गंभीर हालत होने के कारण उनकी जान नहीं बच सकी। 

जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वायरल वीडियो के साथ प्रसारित सूचना पूरी तरह से गलत है। जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर जांच रिपोर्ट साझा करते हुए लिखा है कि किसी प्रकार की घटना के तथ्य/वीडियो को सोशल मीडिया पर लिखने से पहले दोनों पक्ष की वास्तविकता का जानना जरूरी होता है। 
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