वसंत पंचमी बुधवार को सुबह 10.45 बजे से बृहस्पतिवार को दोपहर 1.30 बजे तक है। इसलिए इस बार मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस दो दिन मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार बुधवार को सिद्धि, सर्वार्थसिद्धि और बृहस्पतिवार को अमलकीर्ति और अनफा योग बन रहा है।
बाह के ज्योतिषाचार्य शिव शरण पाराशर ने बताया कि सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग विद्यारंभ, यज्ञोपवीत आदि संस्कारों व अन्य शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना है। वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना के साथ ही विवाह के शुभ मुहूर्त भी बुधवार को शुरू होंगे।
चंद्रमा से दशम भाव में किसी ग्रह के रहने पर अमलकीर्ति योग और सूर्य को छोड़कर चंद्रमा के द्वादश भाव में कोई ग्रह रहता है। अनफा योग बनता है। बृहस्पतिवार को अमलकीर्ति और अनफा योग बन रहा है। उन्होंने बताया कि सरस्वती ब्रह्मा की शक्ति के रूप में भी जानी जाती हैं। नदियों की देवी के रूप में भी इनकी पूजा की जाती है।
बटेश्वर मंदिर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि बुधवार और गुरुवार को दो दिन बसंत पंचमी का उत्सव मनाया जायेगा। दोनों दिन विशेष योग बनने से गौरीशंकर मंदिर में पूजन के लिए भीड़ रहेगी। वहीं वसंत पंचमी पर बटेश्वर, बिजकौली, गोपालपुरा, जरार, बाह, जैतपुर में भी कार्यक्रम होंगे।