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अगर मुझे कोख में ही मार दिया जाता तो कैसे बन पाती राज्यपाल: बेबीरानी मौर्य

Fri, 14 Sep 2018 07:57 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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कार्यक्रम को संबोधित करतीं उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य ने समाज को बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का संदेश दिया है। अपने गृह शहर आगरा में बेबीरानी ने कहा कि थोड़े से लालच में डॉक्टर भ्रूण लिंग जांच कर रहे हैं। उन्होंने डॉक्टरों से अपील करते हुए कहा कि ये धंधा बंद होना चाहिए। 
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उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए बेटियों की शिक्षा और परवरिश पर जोर दिया। कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो वो राज्यपाल नहीं बन पाती। उन्होंने मासिक धर्म की जानकारी के लिए स्कूल में कक्षा लगाने की जरूरत बताई। उन्होंने पर्यावरण और स्वच्छता के लिये भी जागरूक किया। 

राज्यपाल आगरा में आईडीसीए संस्था की ओर से होटल रेडिशन ब्लू में आयोजित मासिक धर्म के जागरूकता कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत राज्यपाल ने दीप प्रज्जवलन कर की। उन्होंने संस्था के इस प्रयास की सराहना की।
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खत्म करना होगा बेटा-बेटी का भेद 

राज्यपाल बेबीरानी मौर्य ने कहा कि बेटा और बेटी का भेद खत्म करना होगा। समाज को सोच बदलनी होगी। तभी परिवर्तन होगा। इस मौके पर बेबीरानी ने कहा कि उन्हें भी कोख में मार दिया गया तो वो राज्यपास कैसे बन पातीं। 

मासिक धर्म विषय पर राज्यपाल ने कहा कि 66 फीसदी महिलाओं को मासिक धर्म से जुड़ी बीमारियों के बारे में जानकारी नहीं है। 12 फीसदी महिलाएं सेनेटरी नैपकिन भी नहीं जानती। उन्होंने बच्चियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्कूल स्तर पर मासिक धर्म की जानकारी की जरूरत बताई। 

फोग्सी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने माना कि पांच फीसदी डॉक्टर ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये सामाजिक समस्या है। 95 फीसदी डॉक्टर इस गलत कार्य में नहीं हैं। फोग्सी अध्यक्ष डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई न होने से तमाम बीमारियों का खतरा रहता है। 

इतनी महिलाएं नहीं कर पातीं नैपकिन का इस्तेमाल

नाइन मूवमेंट के निदेशक अमर तुलसियान ने कहा कि सेनेटरी नैपकिन उपयोग में काफी बदहाल स्थिति है। ताजा रिपोर्ट बताती है कि 82 फीसदी महिलाओं को नैपकिन का उपयोग नहीं कर पाती। 

जबकि चीन में नैपकिन का उपयोग 90 फीसदी महिलाएं करती हैं। शहरों में जरूर जागरूकता आई, लेकिन गांव-कस्बों की स्थिति और खराब है। संस्था ने 30 स्कूलों को सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन निशुल्क प्रदान की। 
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झिझकें नहीं, खुलकर करें बात

मिस इंडिया व्हीलचेयर रहीं प्रिया भार्गव ने कहा कि मासिक धर्म प्राकृतिक अवस्था है, इस पर झिझकें नहीं ओर खुलकर अपनी शिक्षिका, बहन-मां से बात करें। फोग्सी की ब्रांड एंबेसडर साक्षी विद्यार्थी ने बच्चियों से कहा कि यौन हिंसा और छेड़छाड़ का विरोध करें। 

उन्होंने कहा कि कई बार यौन शोषण की शिकार महिलाओं को समाज अंगुली उठाता है, लेकिन आप मुखर होंगी तो अपराधियों को मुंह छिपाने की जरूरत पड़ेगी। डा. सुजाता नायडू ने कहा कि 71 फीसदी किशोरियों को मासिक धर्म आने के बाद इसकी जानकारी हो पाती है। 
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