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सारस पक्षियों को रास आ रही है आवोहवा, जिले में बढ़ता ही जा रहा है कुनबा

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कासगंज के दरियावगंज क्षेत्र में झील किनारे विचरण करते सारस पक्षी। - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। तराई की आवोहवा राजकीय पक्षी सारस को भा रही है। तभी तो इनका कुनबा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पिछले साल जिले में 84 सारस थे। अब संख्या बढ़कर 97 हो गई है। इन दिनों सारस खेतों, आद्र क्षेत्रों में समूह बना कर चुंग रहे हैं। वन विभाग ने इसके संरक्षण के लिए पहल तेज कर दी है।
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राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण के लिए शासन स्तर से पहल की जा रही है। हर साल सारस पक्षियों की गणना होती है। जिले में पिछले साल 84 सारस पाए गए थे। इस साल इनकी संख्या 13 बढ़कर 97 हो गई है। वन विभाग ने जीपीएस रीडिंग के जरिए सारसों की गणना की। अब इसकी रिपोर्ट ऑनलाइन शासन को भेजी जाएगी। सात ही वन विभाग के सभी कर्मचारी सारसों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करेंगे। सारस गणना की रिपोर्ट वन विभाग शासन को सौंपेगा। सारसों के संरक्षण के लिए उच्च स्तरीय कमेटी काम करेगी।
यहां पाए जा रहे सारस
जिले की दरियावगंज झील के अलावा सुन्नीगढ़ी और काली नदी क्षेत्र में सारस पाए जा रहे हैं। यहां सभी सारस इंडियन क्रेन प्रजाति के हैं। इसके अलावा भारत में डिमोसिल क्रेन और कॉमन क्रेन प्रजाति के भी सारस पाए जाते हैं।
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माने जाते हैं किसान मित्र
सारस पक्षी को किसान मित्र माना जाता है। यह पक्षी जलीय पौधों, कीट व कृषि को हानि पहुंचाने वाले छोटे जीवों को कम करने में मदद करता है। सारस किसानों व फसलों के लिए हितकर है।
पिछले तीन सालों का ब्योरा
- 60 सारस थे वर्ष 2017 में जिलेभर में।
- 76 सारस थे वर्ष 2018 में जिलेभर में।
- 84 सारस थे वर्ष 2019 में जिलेभर में।
- 2 रेंज हैं वन विभाग की जिले में।
करा ली है गणना पूरी
सारसों की गणना पूरी करा ली है। सारसों के संरक्षण के लिए पहल की जा रही है। रिपोर्ट शासन को भेज रहे हैं। जिले में अब सारसों की संख्या 97 है। - दिवाकर वशिष्ठ डीएफओ।
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