तकरीबन 10 साल से फर्जी तरीके से बसों का संचालन करके सवारियों को फर्जी टिकट तक थमा दिए जाते हैं। आरएम स्कवैड, एआरएम स्कवैड ने कभी चेकिंग के दौैरान इस तरह की बसों को क्यों नहीं पकड़ा। लखनऊ से चेकिंग के लिए आने वाले दस्तों की नजर में क्यों नहीं आए।
खुलासे के बाद चेकिंग दस्तों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है। अगर इसकी जांच एसटीएफ ने गहराई से की तो आगरा के कई डिपो के कर्मचारियों की मिलीभगत का खुलासा हो सकता है। रोडवेज अधिकारियों की कहना है कि अलीगढ़ में पकड़े गए आगरा परिक्षेत्र के कर्मचारियों के निलंबन और बर्खास्तगी तक हो सकती है। इस प्रकरण की विभागीय जांच भी शुरू हो गई है।
रोडवेज के सूत्रों ने बताया कि इस रैकेट से जुड़े रोडवेज कर्मचारियों ने वर्ष 2012 में तत्कालीन आरएम नीरज सक्सेना पर चैंबर में घुसकर हमला किया था। यह प्रकरण तब काफी चर्चा में रहा था, लेकिन आज तक इनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।