अनामिका को मिठाई खिलाते परिवाार के लोग
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उत्तर प्रदेश के एटा की रहने वाली अनामिका और आजम रहमानी अपने परिवारों में पहली न्यायिक अधिकारी बने हैं। दोनों ने ही शुरू से अफसर बनने का सपना न सिर्फ देखा बल्कि इसके लिए एक जिद तय की जो उन्हें सफलता की मंजिल तक ले गई। उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज (जूडि) में दोनों का चयन हुआ है।
शहर की जीआईसी कॉलोनी में रहने वाले लेखपाल नंदलाल की पुत्री अनामिका ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई सरस्वती विद्या मंदिर से की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में गुरुगोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से बीएएलएलबी किया, जो 2020 में पूरा हो गया। कोरोना की वजह से घर लौटना पड़ा। समय का लाभ उठाते हुए ऑनलाइन कोचिंग और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए प्रतियोगिता की तैयारी शुरू कर दी। उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में यह पहला ही प्रयास था, जिसमें कामयाबी हासिल हुई है। उनके चयन पर परिवार में उत्साह का माहौल है। उनके दो छोटे भाई अंकुर और शनि पढ़ाई कर रहे हैं। उनके मामा राकेश दिवाकर मनरेगा में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी हैं।
आजम रहमानी के पिता और चाचा हैं वकील
वहीं आजम रहमानी शहर के अवागढ़ हाउस के रहने वाले हैं। पिता नजम रहमानी और चाचा अतीकुल रहमान अधिवक्ता हैं। यहां असीसी कॉन्वेंट स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई करने के बाद अलीगढ़ चले गए। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एलएलबी के बाद एलएलएम भी किया और हाल में पीएचडी कर रहे हैं। 2019 में में एलएलबी और 2021 में एलएलएम हो गया था। उन्होंने भी उप्र न्यायिक सेवा में पहली बार ही प्रयास किया, जिसमें सफलता हाथ आई। खास बात है कि तैयारी के लिए कोई कोचिंग नहीं ली। सेल्फ स्टडी और एएमयू के गुरुजनों के दिशा-निर्देशों पर ही तैयारी करते गए। छोटी बहन एलएलएम गोल्ड मेडलिस्ट है और वह भी न्यायिक सेवा की तैयारी कर रही है।
आईएएस अधिकारी बनना चाहती थीं अनामिका
अनामिका ने बताया कि हार्ड वर्क-स्मार्ट वर्क करिए और खुद पर विश्वास रखिए, यही कामयाबी की चाबी है। सपना तो आईएएस अधिकारी बनने का था। लेकिन परिवार में कुछ अधिवक्ता हैं, एक रिश्तेदार जज हैं। इन लोगों की प्रेरणा से बीएएलएलबी की। फिर सोच बदली और न्यायिक अधिकारी बनने की ठान ली। कोरोना में सबकुछ बंद था। 12 से 13 घंटे तक पढ़ाई की। राजस्थान और मध्यप्रदेश की न्यायिक सेवा प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। वहां प्री भी नहीं निकाल पाई। निराशा तो हुई, लेकिन हार नहीं मानी। जब हम कुछ बड़ा सोचते हैं तो छोटी-मोटी नाकामी आती हैं, जिन्हें स्वीकारना चाहिए।
निराशा को अपने ऊपर हावी मत होने दो
आजम रहमानी ने बताया कि शुरू से ही न्यायिक अधिकारी बनने का सपना देखा था। 2019 में एलएलबी की पढ़ाई हो गई थी। लेकिन लंबे समय तक पीसीएस-जे की भर्ती नहीं आई। इससे काफी मायूसी थी। मध्यप्रदेश न्यायिक सेवा में प्रतिभाग किया। वहां मेंस तक पहुंचकर चूक गए। ऐसे में निराशा होने लगी थी। लेकिन उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। न्यायिक अधिकारी बनने का जो सपना देखा था उसके लिए जी-तोड़ मेहनत जारी रखी और आखिर कामयाबी हासिल हुई।