अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय लोकदल ने भी चुनावी बिगुल फूंक दिया है। अकोला के चाहरवाटी इंटर कॉलेज में जनसभा में मुखिया चौधरी अजित सिंह ने इस चुनाव को काफी महत्वपूर्ण बताया। कहा कि 2017 का चुनाव जहां पिछले 15 साल के दौरान प्रदेश में भ्रष्टाचार करने वाली सरकारों को सबक सिखाएगा, वहीं मोदी सरकार का भी भविष्य तय करेगा। इस दौरान रालोद मुखिया भाजपा और सपा पर जमकर बरसे। हालांकि बसपा के प्रति उनका रुख थोड़ा नर्म रहा।
अजित सिंह ने कहा, वर्तमान केंद्र सरकार गरीब, किसान, दलित और पिछड़ों की विरोधी है। भाजपा के झांसे में न आने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का और छह साल में किसानों की आय दोगुनी करने का झांसा दिया। मगर, ढाई साल बाद भी ऐसा कुछ नहीं हुआ। उल्टा बेरोजागारी और महंगाई का ग्राफ बढ़ा है। अच्छे दिन सिर्फ मोदी के आए हैं और किसी के नहीं। जनता अपने पुराने दिन ही वापस मांग रही है। सपा सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। भ्रष्टाचार इतना कि बिना रिश्वत के सरकारी नौकरी में युवाओं को मौका नहीं मिल रहा। लेखपाल भर्ती भी 12 लाख रुपये में हो रही है। सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में पार्टी की नहीं परिवार की सरकार है।
अपने समर्थकों से कहा कि ऊपर से एक-दूसरे के विरोधी दिखने वाली पार्टियां अंदरूनी तौर पर एक-दूसरे की समर्थक हैं। कहा कि प्रदेश में सिर्फ रालोद ही ऐसी पार्टी है जो भाजपा पर भारी पड़ सकती है। उन्होंने यूपी बचाओ, देश बचाओ का नारा भी दिया। अपने इस चुनावी भाषण के दौरान रालोद मुखिया बसपा के खिलाफ नहीं बोले। बल्कि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष से निष्कासित दयाशंकर सिंह के बयान की कड़ी निंदा की।
कैराना कोई मुद्दा नहीं
अजित सिंह ने भाजपा पर सांप्रदायिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास के मुद्दे को भूल भाजपा कैराना को अपना चुनावी मुद्दा बनाने पर तुली है। जबकि कैराना में कोई पलायन नहीं हुआ। वहां, लोगों ने अपनी प्रगति के लिए घर छोड़े। कैराना में हिंदू-मुस्लिम के बीच कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फनगर में दंगों के बाद विकास रुक गया है।