ग्राम प्रधान, ग्राम सदस्य, क्षेत्र व जिला पंचायत सदस्यों का आरक्षण का निर्धारण नए सिरे से होगा। 10 दिन में प्रशासन 690 पंचायतों की नई आरक्षण सूची जारी करेगा। फिर दोबारा आपत्तियां ली जाएंगी। इनके निस्तारण के बाद अंतिम आरक्षण सूची प्रकाशित होगी।
उच्च न्यायालय ने 1995 के आधार पर जारी की गई आरक्षण सूची सोमवार को सुनवाई के बाद निरस्त कर दी। आरक्षण की व्यवस्था को नए सिरे से वर्ष 2015 के आधार पर करने के आदेश दिए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया कि पूरी आरक्षण प्रक्रिया का दोबारा होगी। 2 मार्च को जारी अंतिम आरक्षण सूची निरस्त हो गई है।
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जिले की 690 ग्राम पंचायतों में अनुसूचित वर्ग, पिछड़ा वर्ग व सामान्य वर्ग के लिए पदों का आवंटन शासन पहले ही कर चुका है। आवंटन के आधार पर पुन: ग्राम पंचायत, वार्ड व क्षेत्र वार्ड की आबादी के आधार पर निर्धारण किया जाएगा। जिले में 690 प्रधान पदों में 354 पद अनारक्षित हैं। 154 पद अनुसूचित वर्ग व 182 प्रधान के पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इनमें एससी महिला 57, ओबीसी महिला 66 और सिर्फ महिलाओं के लिए 112 पद समेत कुल 235 पद हैं।
ग्राम सदस्यों के लिए ज्यादा कसरत
15 ब्लॉक और 51 जिला पंचायत वार्ड में आरक्षण का निर्धारण तीन से चार दिन में हो जाएगा। परंतु 690 पंचायतों में 1080 ग्राम पंचायत सदस्य हैं। 1200 से अधिक क्षेत्र पंचायत सदस्यों के वार्ड हैं इनके आरक्षण निर्धारण में प्रशासन को नए सिरे से दोबारा सबसे ज्यादा कसरत करनी पड़ेगी।
519 आपत्तियों के परिणाम भी रद्
जिला मजिस्ट्रेट प्रभु एन सिंह ने बताया 2 मार्च को जारी आरक्षण सूची पर 4 से 8 मार्च तक 519 आपत्तियां आई। इनका परिणाम रद् कर दिया है। अब नई आरक्षण सूची के आधार पर आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। उनकी निस्तारण रिपोर्ट सार्वजनिक होगी।
10 से 15 दिन पिछड़ी चुनाव प्रक्रिया
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रक्रिया नई आरक्षण व्यवस्था के कारण 10 से 15 दिन पिछड़ सकती है। आरक्षण सूची, आपत्तियों का निस्तारण और फिर अंतिम सूची का प्रकाशन आदि अप्रैल के पहले सप्ताह में पूर्ण हो सकेगा। ऐसे में 10 अप्रैल के बाद अधिसूचना जारी हो सकती है।
सरकार नहीं चाहती चुनाव
सरकार नहीं चाहती समय पर चुनाव कराएं जाएं। जानबूझकर गलत आरक्षण निर्धारण किया गया। उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं। - अनीश चाहर, जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय पंचायत राज प्रधान संगठन
खामियों को किया जाए दूर
आरक्षण तय करते समय आबादी अनुपात का ध्यान रखा जाए। पिछले आरक्षण में बहुत गड़बड़ियां थीं। आबादी के हिसाब से आरक्षण नहीं किया गयाथा। - कुलदीप सिकरवार, प्रभारी, राष्ट्रीय पंचायत राज प्रधान संगठन