दावेदार का कांजी हाउस की फाइलों में देखा जाता है नाम
पंचायत चुनाव में जो भी व्यक्ति दावेदारी करेगा, उसे जिला पंचायत, ब्लॉक तथा ग्राम पंचायत का किसी भी प्रकार का बकाया चुकाना ही होगा। इसलिए जब भी कोई ग्रामीण जिला पंचायत से नामांकन प्रपत्र खरीदता है और एनओसी प्राप्त करता है तो उसे ग्राम पंचायत का विभव कर, दुकानों का कर, हड्डी चमड़ा कर, तहबाजारी कर, अड्डा पड़ाव कर, कृषि फार्म कर आदि के अलावा कांजी हाउस कर में भी एनओसी प्राप्त करने वालों के नाम देखे जाते हैं।
क्या है कांजी हाउस टैक्स
गांव में किसान अधिकतर अपने पशुओं को लावारिस छोड़ देते थे, जिससे पशु किसानों की फसल खा जाते थे। इस पर नियंत्रण के लिए जिला पंचायत द्वारा गांवों में क्षेत्र वार पशुशालाएं खोल दी थीं। इन पशुशालाओं में खेतों में नुकसान करने वाले किसानों के बाहर घूमने वाले पशुओं को बांध दिया जाता था। जब किसान अपने पशु को लेने आता था उसे पशु तो दे दिया जाता था लेकिन उस पर टैक्स अध्यारोपित कर दिया जाता था। जिसे वह बाद में भी चुका सकता था। इस कर को ही कांजी हाउस टैक्स कहा जाता है।
मर चुके हैं अधिकतर किसान
इसे सिस्टम की कमी कहें या फिर किसानों की लापरवाही, जिन किसानों के नाम इस फाइल में दर्ज हैं, उनमें 39 किसानों में से अधिकतर किसानों की मौत हो चुकी है लेकिन न तो किसानों के मरने की सूचना जिला पंचायत में दर्ज है और न ही इस किसानों से इस कर को वसूला जा सका है।
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी सुधीर कुमार ने बताया कि किसी को भी एनओसी देने से पहले हम जिला पंचायत के सभी कर की फाइलों को चेक करते हैं ताकि यदि किसी किसान पर कोई टैक्स हो तो उससे वसूलकर एनओसी दी जा सके।