दलित बहुल ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र को आगरा की हंसली (गले का हार) भी कहा जाता है। शहरी सीमा से सटे गांव इसमें शामिल हैं। 2012 में अस्तित्व में आई इस सीट पर 2017 में भाजपा की हेमलता दिवाकर ने मोदी लहर में बसपा के कालीचरन सुमन को 65,296 मतों के अंतर से हराया था। मौजूदा विधायक के प्रति जनता की नाराजगी का फीडबैक मिलने के बाद भाजपा ने हेमलता दिवाकर का टिकट काट कर उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबीरानी मौर्य पर दांव लगाया है।
2017 का परिणाम
प्रत्याशी बदला, पर सवाल अब भी पीछा कर रहे
भाजपा ने यहां की विधायक के प्रति नाराजगी को लेकर प्रत्याशी तो बदल दिया, पर नाराजगी के सवाल अब भी पीछा कर रहे हैं। सबसे ज्यादा सवाल विधायक के पांच साल दिखाई नहीं देने को लेकर है। नाराजगी का आलम ये रहा है कि सिरौली, अजीजपुर में लोगों ने विधायक लापता के पोस्टर लगाए थे।
छावनी सीट पर भी पड़ता है प्रभाव
ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की सीमाएं छावनी और खेरागढ़ विधानसभा क्षेत्र से सटी हुई हैं। ग्रामीण की तरह छावनी सीट भी दलित बहुल है, जबकि खेरागढ़ में जाट, क्षत्रिय व कुशवाह मतदाता अधिक हैं। ग्रामीण सीट का असर छावनी विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है, लेकिन खेरागढ़ में अधिक असर नहीं होता। इस बार भी इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में पुराने मुद्दे हैं। हालांकि, छावनी विधानसभा क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा शहर में होने के कारण यहां शहरी क्षेत्र के ही मुद्दे रहते हैं।