हर मत बहमूल्य है। परिणामों के बाद इसका महत्व पूर्णतया समझ में आता है। एक वोट किसी को विजय दिला सकता है तो किसी को हार। ऐसे में जरूरी है कि रविवार को को मतदान अवश्य करें और लोकतंत्र के महापर्व में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। कासगंज जिले में 1957 से 2002 के बीच नौ बार ऐसे मौके आए हैं जब चार से 2120 मतों तक के अंतर से प्रत्याशी हारे हैं।
देश की आजादी के बाद से अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इसमें नौ बार हार जीत का अंतर काफी कम रह गया। जिले की सियासत में वर्ष 1967 में हुए चुनाव में सोरों विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरे कांग्रेस प्रत्याशी एनराम की किस्मत मात्र 4 वोटों के अंतर से बदल गई। उनको जनसंघ प्रत्याशी एसराम से हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा कई बार हारजीत का अंतर काफी कम वोटों से रहा।
जब कोई प्रत्याशी ऐसी स्थिति में चुनाव हारता है तो उसके समर्थक पछताते दिखाते हैं, लेकिन इस पछतावे से कोई फायदा नहीं निकलता। जीवन भर ऐसी हार जीत प्रत्याशी व उसके समर्थकों को कसकती रहती है। ऐसे में आप अपने वोट की कीमत को समझें। आप जिस प्रत्याशी को पसंद करते हैं उसके लिए अपना वोट डालने अवश्य जाएं।