मैनपुरी। परीक्षा में नकल पर नकेल के बाद अब शासन ने शिक्षकों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। वर्ष 2020 यूपी बोर्ड परीक्षा में विद्यालयों के परीक्षा परिणाम की डिटेल शासन ने तलब की है। 30 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम वाले कॉलेजों पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।
इस बार बोर्ड परीक्षा-2020 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराई गई। शासन ने अब शिक्षा व्यवस्था के सुधार की भी पहल शुरू कर दी गई है। कॉलेज के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ-साथ शिक्षकों की अपने विषय के प्रति जिम्मेदारी तय की जा सके इसे देखते हुए बोर्ड परीक्षा परिणाम का मूल्यांकन किया जा रहा है।
शासन के अपर सचिव के निर्देश पर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जिले के उन कॉलेजों का रिकॉर्ड मांगा है जिनका परीक्षा परिणाम 30 प्रतिशत से कम रहा हो। सचिव का पत्र प्राप्त होने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में परीक्षा परिणाम का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। 30 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम वाले कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को स्पष्टीकरण देना होगा।
फेल विषय के शिक्षक को भी देना होगा जवाब
राजकीय और सहायता प्राप्त कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए शासन ने यह भी निर्णय लिया है कि जिस शिक्षक के विषय में छात्र-छात्राएं अधिक फेल हुए हैं उन विषयों के शिक्षकों को जवाब देना होगा। जिला विद्यालय निरीक्षक ने प्रधानाचार्यों से इस संबंध में भी जानकारी मांगी है कि उनके यहां किस विषय में अधिक बच्चे फेल हुए हैं। उस विषय का शिक्षक कौन है इसकी भी जानकारी दी जाए।
निर्धारित प्रारूप पर आज ही दें जानकारी
जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार वर्मा ने जिले के सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि वे हर हाल में शुक्रवार तक बोर्ड परीक्षाफल की जानकारी निर्धारित प्रारूप पर प्रधान करें। संयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा मंडल आगरा ने तत्काल सूचना मांगी है।