डा. बीआरए यूनीवर्सिटी के भ्रष्ट अफसराें और कर्मचारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। विधानसभा की आश्वासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जितेंद्र कुमार इनकी विजिलेंस जांच कराने जा रहे हैं।
शुक्रवार को लखनऊ में प्रमुख सचिव ने समिति से पांच बिंदुओं पर रिपोर्ट प्राप्त की है। दरअसल, बीते दिनों फर्जीवाड़ा, मार्कशीट-डिग्री की समस्याआें पर विधानसभा की आश्वासन समिति ने विवि का दौरा किया था। समिति में फीरोजाबाद विधायक मनीष असीजा, अलीगढ़ विधायक दलजीत सिंह समेत पांच सदस्य शामिल थे।
65 हजार एमडब्ल्यू मार्कशीट
रिपोर्ट में 65 हजार मार्कशीट एमडब्ल्यू (मार्क वांटिंग) की हैं। ये 2013 से 2015 सत्र की हैं। प्रार्थना पत्र देने के बाद भी छात्रों की समस्या हल नहीं हुई।
20 हजार में डिग्री-मार्कशीट सत्यापन
मार्कशीट-डिग्री सत्यापन में भी कर्मचारी खेल कर रहे हैं। अगर किसी की नौकरी से मामला जुड़ा है तो इसके लिए मोटा कमीशन वसूला जाता है। ये रकम 20 हजार रुपये तक है। अन्य छोटी समस्याओं का बिना रुपये दिए समाधान नहीं।
एजेंसी के टेंडर में भी कमीशन
रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी के टेंडर में मोटा कमीशन लिया गया। इसी के चलते जानबूझकर टेंडर की शर्तें सामान्य रखीं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रिजल्ट देते ही एजेंसी का 90 फीसदी भुगतान भी हो गया।
सत्र लेट, मार्कशीट-डिग्री नहीं
शैक्षणिक सत्र भी लेट है, समय पर रिजल्ट नहीं। इस सत्र की बात करें तो अभी तक एक ही सब्जेक्ट का रिजल्ट निकाला जा सका।
माइंडलॉजिक प्राइवेट लिमिटेड पर मुकदमा
शुभ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के बाद विश्वविद्यालय को 2013 का परिणाम बनाने वाली माइंडलोजिक इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड पर भी मुकदमा दर्ज कराना पड़ा। दरअसल, शुक्रवार को लखनऊ में मीटिंग थी, ऐसे में अपनी गर्दन बचाने के लिए गुुरुवार की रात कुलसचिव केएन सिंह की ओर से थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज कराया गया। जिसमें अपूर्ण परीक्षाफल और गोपनीय चार्ट न उपलब्ध कराने की बात कही है।