रेलवे अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के मामले में यूनियन लीडर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आगरा रेल डिवीजन ने यूनियन लीडर को निर्देश दिया है कि वह एक सीनियर अधिकारी के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को साबित करें, नहीं तो कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
आगरा रेल डिवीजन की ओर से 21 नवंबर को रेलवे के यूनियन लीडर को नोटिस जारी किया गया है। ये यूनियन लीडर एक लोको पायलट भी हैं। इसमें कहा है कि वह तीन दिनों के अंदर अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करें कि अधिकारी ने रिश्वत ली थी। अगर वह ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो इस आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी कि उन्होंने जानबूझकर अधिकारी की प्रतिष्ठा खराब करने की कोशिश की।
चेतावनी नोटिस के अनुसार यूनियन लीडर सुकेश यादव ने 17 नवंबर, 2025 को रेलवे स्टाफ की एक जॉइंट मीटिंग की। इस दौरान उन्होंने खुले तौर पर आरोप लगाया कि सीनियर डिवीजनल ऑपरेशन मैनेजर (कोऑर्डिनेशन) ने प्रमोशन के बाद अच्छी पोस्टिंग के बदले ट्रेन मैनेजरों से रिश्वत ली। नोटिस में कहा गया है कि यूनियन लीडर ने यह भी आरोप लगाया कि किरावली के स्टेशन मास्टर का शोलाका और बाद में मथुरा ट्रांसफर किया गया, जिसके लिए सीनियर डीओएम ने कथित तौर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत ली।
सुकेश यादव नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेन्स यूनियन के डिविजनल सेक्रेटरी हैं। उन्होंने यूनियन के लेटरहेड पर डिविजन के सीनियर अधिकारियों को पत्र लिखा। दो पेज के पत्र में दावा किया गया कि 100 से ज्यादा रेलवे गार्डों ने डिपार्टमेंटल टेस्ट में प्रमोशन पाने के लिए सीनियर डीओएम (सी) को सात लाख रुपये से सात लाख रुपये तक की रिश्वत दी थी, जिसे बाद में कैंसल कर दिया गया था।
लेटर में रेलवे बोर्ड के नियमों का उल्लंघन करते हुए नदबई स्टेशन से ट्रैफिक इंस्पेक्टरों के ट्रांसफर में गड़बड़ी और उन्हें परेशान करने के इरादे से सात महीने के अंदर 150 से ज्यादा स्टाफ के ट्रांसफर का भी आरोप लगाया गया था। डिविजन के एक अधिकारी ने कहा कि हमने उनसे इन सभी आरोपों का सबूत जमा करने को कहा है। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।