कीठम-भांडई रेलवे लाइन में अधिग्रहण हुए प्लॉट का मुआवजा न मिलने से परेशान ऑटो चालक ने सोमवार शाम को फंदे पर लटक कर जान दे दी। इससे परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर एसडीएम सदर और पुलिस पहुंच गई। परिजन ने आवास और मुआवजे की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मूलरूप से आगरा के मोती कटरा तथा वर्तमान में अंगूठी गांव की नई आबादी के रहने वाले किशोर कुमार प्रजापति करीब 70 वर्ष पुत्र दाऊदयाल किराए पर ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। पत्नी कमला देवी ने बताया कि करीब छह साल पूर्व अंगूठी गांव में स्थित नई आबादी कॉलोनी में 67 गज का प्लॉट खरीदा था, उसमें ही टीनशेड डालकर परिवार के साथ रहते थे। प्लॉट में होकर कीठम-भांडई रेलवे लाइन निकल गई है। रेलवे का कार्य प्रगति पर है। पत्नी कमला के मुताबिक, रेलवे के अधिकारी लगातार घर खाली करने का दबाव बना रहे थे। लेकिन मुआवजा न मिलने के कारण वे घर खाली नहीं कर रहे थे।
इसे लेकर किशोर काफी परेशान रहने लगा था, सोमवार शाम को पत्नी कमला चाय बना रही थी, पुत्रवधू सब्जी लेने बिचपुरी गई थी तथा नाती और नातिन ट्यूशन पढने गए थे। तभी उसने कमरे में साड़ी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। इससे परिवार में कोहराम मच गया। एसडीएम सदर व पुलिस मौके पर पहुंच गई। ग्राम प्रधान हाकिम सिंह सोलंकी के अलावा अन्य ग्रामीण भी मौके पर आ गए। परिजन ने एसडीएम से आवास और मुआवजे की मांग की है। चौकी इंचार्ज बिचपुरी ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसीपी लोहामंडी गाैरव सिंह ने बताया कि परिजन ने मुआवजा नहीं मिलने की वजह से आत्महत्या का आरोप लगाया है। सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
सदमे से बेटे की भी हो चुकी है मौत
मृतका की पत्नी कमला देवी ने बताया कि उसके तीन बेटे और एक बेटी है। बेटी रीना की शादी हो चुकी है। बडे़ बेटे राजेश की वर्ष 2016 में बीमारी के कारण मौत हो गई है। सबसे छोटे बेटे मनीष की प्लॉट का मुआवजा न मिलने के सदमे में मौत हो चुकी है। उसके चार बच्चे हैं, जिनमें सुनयना 15 वर्ष कक्षा दस में पढ़ती है। अजय 14, सूरज 11 और गौरी 11 वर्ष कक्षा छह में पढ़ते हैं। मनीष की पत्नी सोनम अमरपुरा में पायल बनाने का काम करती है। सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, मृतक का दूसरे नंबर का बेटा मनोज जयपुर में रहकर होटल में मजदूरी करता है।
सिविल कोर्ट में विचाराधीन का मामला
मौके पर पहुंचे अंगूठी के लेखपाल जितेंद्र चौधरी ने बताया कि यह प्लॉट गाटा संख्या 299 में है। इस गाटा संख्या में करीब 2.25 जमीन अंगूठी के रहने वाले रंधीर व देवेंद्र पुत्र गोविंद की थी। लेखपाल के मुताबिक, वर्ष 2019 में रंधीर ने अपनी जमीन का एग्रीमेंट कॉलोनाइजर के नाम कर दिया। वहीं, उसके भाई देवेंद्र ने कॉलोनाइजर के नाम पावर ऑफ अटॉर्नी कर दी। पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर ही मृतक किशोर ने अपनी पत्नी कमला के नाम प्लॉट खरीदा था। लेकिन खतौनी में खरीदने वालों के नाम नहीं चढ़े। सिविल कोर्ट में रंधीर सिंह और कॉलोनाइजर शकील अहमद के बीच वाद विचाराधीन है। इसी कारण मुआवजा नहीं मिल सका है।