आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित ताजगंज में दो गांवों के मतदाताओं ने 35 साल बाद शहर की सरकार बनाने में सहभागिता निभाई। पहली बार नगर निगम की सीमा में आने के बाद गांव नौपुरा और नगला अरहर के लोगों में मतदान को लेकर भारी उत्साह था।
गांव के युवा, महिलाएं और बुजुर्ग अपने मताधिकार का प्रयोग करने नौपुरा स्थित मतदेय स्थल पर पहुंच रहे थे। ताजगंज के गांव नौपुरा और नगला अरहर वार्ड 72 में शामिल किए गए हैं।
आगरा में नगला अरहर के हरीशंकर ने बताया कि तकरीबन 35 साल से दोनों गांवों के लोग उपेक्षा के शिकार थे, उन्हें ग्राम पंचायत से बाहर कर दिया गया था और वे नगर निगम की सीमा में आने के बावजूद नगर निगम के चुनावों में हिस्सेदारी नहीं कर पा रहे थे। इस बार नए परिसीमन में 35 साल बाद दोनों इलाकों की किस्मत बदली और अब उन्हें अपना पार्षद चुनने का हक मिला है।
गांव नगला अरहर के ही तरुण कुमार का कहना था कि गांव में खरंजे, पानी और जलनिकासी की समस्याओं से लोग बरसों से जूझ रहे हैं। पार्षद बनने के बाद कम से कम गांव में नाली, पानी और खरंजे आदि समस्याओं से छुटकारा मिल सकेगा।
नगला अरहर की सविता देवी, नौपुरा की राजकुमारी ने कहा कि नगर निगम की सीमा में आने के बाद गांवों में विकास कार्यों के लिए कम से कम किसी से गुहार तो लगा सकेंगे।
एक जोड़ी ईवीएम के सहारे सैकड़ों मतदाता
मतदान
- फोटो : अमर उजाला
नौपुरा स्थित प्राथमिक विद्यालय में पहली बार मतदेय स्थल बनाया गया था, यहां केवल एक जोड़ी ईवीएम लगाई गई थी। इस कारण मतदेय स्थल पर सुबह सात बजे से ही लाइन लगी हुई थी, जो कि दोपहर तक खत्म नहीं हो सकी थी।
ईवीएम का एक सेट होने के कारण महिलाओं और पुरुषों की व्यवस्था इसी मतदेय स्थल पर की गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि नौपुरा की आबादी तकरीबन डेढ़ हजार तो नगला अरहर की आबादी भी 1600 है।