नोटबंदी के बाद भी जाली करेंसी मिलने के मामले सामने आ रहे हैं। कासगंज पुलिस ने शुक्रवार को जाली करेंसी चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
इन लोगों के पास से साढ़े 11 लाख रुपए की जाली करेंसी बरामद हुई है। सभी जाली नोट पांच-पांच सौ के हैं। पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासा किया है, उसे जानकर पुलिस भी हैरान रह गई।
पुलिस अधीक्षक शिवहरि मीना के अनुसार पकड़े गए दोनों अभियुक्त अलीगढ़ जिले के रहने वाले हैं। दो साल से जाली नोटों का धंधा कर रहे थे। नौकरी लगवाने के नाम पर भी ये लोग रुपए लेते थे।
जाली नोटों की 23 गड्डियां मिलीं
मुखबिर की सूचना पर थाना सहावर पुलिस ने अमांपुर रोड नहर पुल के पास से कार सवार इन लोगों को पकड़ा है। तलाशी के दौरान पांच-पांच सौ के जाली नोटों की 23 गड्डी मिली हैं।
आरोपियों के पास से उत्तर प्रदेश पुलिस का फर्जी आईडी भी मिली है। साथ ही एक फर्जी वोटर आईडी और आधार कार्ड की फोटो कॉपी बरामद हुई हैं। आरोपियों के नाम मोहम्मद अकील और नेपाल सिंह हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि एक लाख रुपए के एवज छह लाख की जाली करेंसी लेते थे। इसके बाद गड्डी के ऊपर व नीचे
असली नोट और बीच में जाली नोटों लगाकर चला देते थे।
नौकरी के नाम पर भी लेते थे पैसे
पूछताछ में पता चला है कि आरोपी नौकरी लगवाने के नाम पर भी लोगों से रुपए लेते थे। नौकरी न लगवाने की दशा में जाली नोटों के रूप में रकम वापस कर भाग जाते थे।
पुलिस अधीक्षक शिवहरि मीना ने बताया कि जाली करेंसी रैकेट में कई अन्य लोगों भी शामिल हो सकते हैं। इसके लिए इन दोनों से गहनता से पूछताछ की जा रही है।