आगरा के ताजगंज के गोबर चौकी से मजदूर दीपू राठौर की चार साल की बेटी खुशी और दो साल के बेटे यश का दोस्त लोकेंद्र झा ने ही अपहरण कर लिया। दोनों को बस से ग्वालियर ले जाने लगा। बच्चों के लापता होने पर मां पूनम ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने एक घंटे तक वाहनों की चेकिंग की। सैंया टोल प्लाजा पर बस में सवार आरोपी को पकड़ लिया। उसके पास से बच्चों को मुक्त करा लिया गया। इस मामले में आरोपी के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया है। आशंका है कि वो बच्चों को बेचने के लिए अगवा कर ले जा रहा था।
सीओ सदर महेश कुमार ने बताया कि गोबर चौकी स्थित अमिता नगर निवासी दीपू राठौर मजदूरी करता है। उसकी दोस्ती ग्वालियर के डबरा निवासी लोकेंद्र झा से है। शनिवार शाम को लोकेंद्र दीपू से मिलने आया था। दोनों ने मुगल पुलिया पर शराब पी। इसके बाद दीपू चला गया। मगर, लोकेंद्र दीपू के घर पहुंच गया।
घर के बाहर दीपू की बेटी खुशी और बेटा यश खेल रहे थे। दोनों को लोकेंद्र ने चॉकलेट दिलाने का लालच दिया। इसके बाद अपने साथ ही लेकर चला गया। बच्चों को लेकर वापस नहीं आने पर मां पूनम को चिंता हो गई। क्षेत्र के लोगों ने लोकेंद्र को गोबर चौकी से बाहर जाते देखा था। इस पर साढ़े पांच बजे पूनम ने पुलिस को सूचना दी।
लोकेंद्र झा के बारे में भी बताया। इस पर लोकेंद्र की तलाश की, लेकिन उसका मोबाइल स्विच आफ हो गया। उसकी लोकेशन सैंया की तरफ जाने की आ रही थी। इस पर सैंया पुलिस को सक्रिय किया गया। सैंया टोल पर पहले से किसान आंदोलन को लेकर पुलिस तैनात थी।
पुलिस ने वाहनों को चेक करना शुरू कर दिया। सैंया से ग्वालियर की तरफ जा रही एक बस में आरोपी लोकेंद्र बच्चों के साथ पिछली सीट पर बैठा हुआ मिल गया। इस पर उसे हिरासत में ले लिया गया। सूचना पर थाना ताजगंज पुलिस भी पहुंच गई।
...तो बेचने के लिए किया था अपहरण
सीओ सदर महेश कुमार ने बताया कि आरोपी नशे में था। वह बच्चों को लेकर जाने का सही कारण नहीं बता सका। हालांकि आशंका है कि बच्चों को बेचने के लिए अगवा किया हो। क्योंकि जिले से बाहर ले जाने के पीछे यही मकसद हो सकता है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। आरोपी के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
...तो रोने लगे बच्चे
बस में मिलने के बाद पुलिस ने बच्चों से नाम पूछा था। इसके बाद बच्चों को थाने पर ले आई थीं। पुलिस के लाने पर बच्चे रोने लगे। बाद में पुलिस उन्हें मां-बाप के पास लेकर आई। परिजनों ने बताया कि दीपू और लोकेंद्र एक ही गांव के रहने वाले हैं। दीपू की पत्नी पूनम मायके में रह रही है। दीपू भी पत्नी के पास आ गया था। लोकेंद्र दिल्ली में काम करता है। शुक्रवार को ही आया था। बच्चे लोकेंद्र को पहले से जानते थे। इस कारण ही उसके साथ चल दिए थे। बच्चे बस में भी रो रहे थे, लेकिन लोकेंद्र ने चुप कर दिया। पुलिस की अलर्टनेस से बच्चे बच गए।
ट्रेन में बैठकर ग्वालियर पहुंच गया था सदर से लापता हेमंत
सदर के नॉर्थ रेलवे कालोनी से लापता सात साल का हेमंत पुत्र भारत मिल गया। वह ग्वालियर चला गया था। पुलिस को चाइल्ड लाइन से बच्चे के बारे में सूचना मिली। इस पर बच्चे को घर पहुंचा दिया गया।
सात दिसंबर को दोपहर साढ़े तीन बजे हेमंत घर से बाहर खेलने के लिए गया था। उसके बाद वापस नहीं आया। इस पर परिजनों ने तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। थाना सदर में मुकदमा दर्ज किया गया। शुक्रवार को चाइल्ड लाइन ने पुलिस को सूचना दी कि हेमंत ग्वालियर स्थित चाइल्ड लाइन के कार्यालय में है।
इस पर पुलिस टीम पहुंच गई। एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि बच्चे को ग्वालियर से पुलिस ले आई। उसने परिजनों को बताया कि वह घर से निकल कर शाहगंज रेलवे पुल के नीचे पहुंच गया था।
यहां उसको एक ट्रेन खड़ी मिली। वह ट्रेन में चढ़ गया। वह रेलवे स्टेशन पर नहीं रुकी। ट्रेन के रुकने पर वो ग्वालियर स्टेशन पर उतरा। चाइल्ड लाइन की टीम बच्चे को ले गई। उसे आश्रय गृह में रखा गया था।