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Agra News: प्लॉट मिला न मकान, 14 साल से कॉलोनी वीरान, SSP से शिकायत के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

Fri, 02 Sep 2022 12:03 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

अंसल एपीआई की धोखाधड़ी के ये महज दो मुकदमे नहीं है। इससे पहले इस पर आठ से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इन सब में पुलिस की विवेचना चल रही है।
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थाना सिकंदरा आगरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में अंसल एपीआई की कॉलोनी में 14 साल बाद भी लोगों को प्लॉट और मकान नहीं मिल सके हैं। कॉलोनी वीरान पड़ी है, बिल्डर के लोग सुनने को तैयार नहीं हैं। खरीदारों ने एसएसपी से शिकायत की, इसके बाद थाना सिकंदरा में दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं। 

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मंगलम एस्टेट, दयालबाग निवासी अमित बंसल का फर्नीचर का व्यवसाय है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में सिकंदरा स्थित अंसल एपीआई में 0066 नंबर 240 वर्गगज का प्लॉट बुक कराया था। बिल्डर ने दावा किया था कि इसमें सड़क, हरा  भरा पार्क और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था होगी। इसके लिए 11 लाख से अधिक रकम ले ली गई, लेकिन आज तक स्वामित्व नहीं दिया। प्लॉट स्थल पर आज तक कोई विकास नहीं हुआ है। बिल्डर की कंपनी में बात करने पर कर्मचारी टालमटोल करते हैं। उन्होंने एसएसपी से शिकायत की। इसके बाद मुकदमा दर्ज किया गया है।

दूसरा मुकदमा मंडी सईद खां निवासी विजेंद्र कुमार मदान ने दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में 150 वर्ग गज का मकान संख्या 0057 बुक कराया था। बिल्डर की कंपनी को मकान की कीमत अदा की जा चुकी है। 14 साल बाद भी साइट पर कोई काम नहीं कराया गया है। मकान भी नहीं दिया गया है। कॉलोनी वीरान पड़ी हुई है। एसपी सिटी से शिकायत की। इसके बाद जांच की गई। जांच में आरोप सही पाए गए। एसएसपी के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें अंसल एपीआई के एक व्यक्ति को नामजद किया गया है।

अंसल पर कई मुकदमे

अंसल एपीआई की धोखाधड़ी के ये महज दो मुकदमे नहीं है। इससे पहले इस पर आठ से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इन सब में पुलिस की विवेचना चल रही है। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि विवेचना के बाद कार्रवाई की जाएगी।

कई नामी बिल्डरों पर दर्ज हैं मुकदमे

शहर में बिल्डरों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इसमें फ्लैट पर कब्जा नहीं देने, किसी और को बेचने, प्लॉट पर कब्जा नहीं देने और मकान बनाकर नहीं देने आदि के आरोप लगते रहे हैं। थाना हरीपर्वत, न्यू आगरा, सिकंदरा, ताजगंज, जगदीशपुरा में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। मगर, बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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