मृतकों के मां हुई बेसुध
- फोटो : अमर उजाला
घर के चिराग बुझे
गड्ढे में भरे बारिश के पानी में डूबने से एक घर के दो चिराग बुझ गए। दोनों बेटों की मौत से मां-बाप बेसुध हो गए। बहन का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया। चीख-चीख कर बहन कह रही थी कि अब वह रक्षाबंधन पर राखी किसे बांधेगी।
नरेंद्र कुमार के परिवार में दो बेटे और एक बेटी थी। हंसते खेलते परिवार पर मंगलवार को दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। हादसे ने दोनों बेटे अंजुल और आशू को छीन लिया। पानी भरे गड्ढे से बच्चों के शव बाहर आते ही मां-बाप बेसुध हो गए।
20 वर्षीय बेटी शालू भी भाइयों के शवों को देखकर दहाड़ मारकर रोने लगी। बेसुध पिता हादसे के लिए खुद को जिम्मेदार ठहरा रहा था। उसका कहना था कि वह बच्चों को साथ लेकर खेत पर नहीं जाते तो शायद हादसा नहीं होता।
पीडब्ल्यूडी को जिम्मेदार ठहरा रहे ग्रामीण
हादसे के लिए परिजन और ग्रामीण पीडब्ल्यूडी के अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पिता नरेंद्र कुमार और अन्य परिजनों का कहना है कि छह महीने पहले ही पीडब्ल्यूडी की ओर से गांव के लिए सड़क का निर्माण कराया गया था। इस दौरान पास ही खेत से मिट्टी का उठान किया गया। इससे करीब दस फीट गहरा गड्ढा हो गया। बारिश में गड्ढे में पानी भर गया है।
एक-दूसरे को बचाने में तो नहीं डूब गए दोनों भाई
हादसे के बाद पुलिस हादसे के कारणों की जांच में जुट गई। परिजन और ग्रामीण भी कई तरह के कयास लगा रहे है। कयास है कि छोटा बेटा पानी में गिर गया हो और उसे बचाने के प्रयास में बड़ा बेटा भी डूब गया।
करहल के नायब तहसीलदार अवनीश कुमार ने बताया कि हादसे की सूचना उच्चाधिकारी को दी गई है। पीड़ित परिवार की हर संभव मदद प्रशासन की ओर से की जाएगी। हादसे के कारणों की जांच कराई जाएगी।