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खांसी की आवाज से हो सकेगी क्षयरोग की पहचान

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मैनपुरी। अब क्षयरोग की पहचान खांसी की आवाज से हो सकेगी। इसके लिए टीबी कफ कलेक्शन एप तैयार किया गया है। इसमें रोगी या चिह्नित व्यक्ति की आवाज आठ बार रिकार्ड की जाएगी। इस प्रक्रिया को सहमति के बाद अपनाया जाएगा। पूरे देश में 21 हजार लोगों के नमूने लिए जाएंगे।
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सीएमओ डॉ. पीपी सिंह ने बताया कि देश को क्षय रोग से मुक्त कराने के लिए नया एप डिजाइन किया गया है। इसके जरिए चिह्नित लोगों की आवाज आधुनिक मोबाइल में करीब आठ बार रिकार्ड की जाएगी। आवाज अलग-अलग तरह की होंगी। प्रथम चरण में इसका सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में पूरे देश से 21 हजार लोगों की आवाज के सैंपल लिए जाएंगे। बाद में इसका अध्ययन होगा। इसमें 750 टीबी रोगी होंगे। 750 नॉन टीबी एवं छह हजार टीबी लक्षण वालों के संपर्की या रिश्तेदार होंगे। कफ साउंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सोल्यूशन टू डिट्रेक्ट टीबी को लेकर ऑन लाइन प्रशिक्षण कराया गया है। सर्वे के लिए वीडियो भी जारी किया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पीपी सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के ज्वाइंट डायरेक्टर निशांत कुमार ने सभी प्रदेशों को इस बारे में पत्र लिखकर जानकारी उपलब्ध कराई है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि कफ साउंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सोल्यूशन टू डिट्रेक्ट टीबी के लिए जनपद से आवाज के सैंपल भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि सर्वे में जिन लोगों की आवाज रिकार्ड की जाएगी उनके नाम-पते गोपनीय रखे जाएंगे। जिसकी आवाज रिकार्ड होगी उसको भी रिपोर्ट की जानकारी नहीं दी जाएगी। रिपोर्ट किसी को भी शेयर नहीं होगी।
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इस प्रकार होगा कार्य
-प्रशिक्षित अधिकारी/ सुपरवाइजर चिह्नित व्यक्ति के घर मास्क पहनकर जाएंगे।
-उसको पूरी प्रक्रिया के बारे में अवगत कराया जाएगा, सहमति ली जाएगी
-इसके बाद उसे मास्क पहनकर घर के बाहर आने को कहा जाएगा
-मोबाइल एप चालू करके 30 सेकेंड की आवाज रिकार्ड होगी
-उसे खांसने, एक से 10 तक गिनती, अ, आ आदि बोलने को कहा जाएगा
-कफ का साउंड तीन बार रिकार्ड होगा, इसके अलावा अन्य प्रक्रिया होंगी।
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