ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) की बंदिशों से कराहते उद्योगों को संजीवनी मिल सकती है। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और भरतपुर के नगर निगम, विकास प्राधिकरण, वन एवं अन्य हितधारक विभागों ने बृहस्पतिवार को सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी की बैठक में प्रतिबंधों को शिथिल करने और ऑरेंज, ग्रीन व व्हाइट श्रेणी उद्योगों को शुरू कराए जाने का सुझाव दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक साल पहले टीटीजेड में उद्योगों की स्थापना और विस्तार पर रोक लगा रखी है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने उद्योगों को रेड, ऑरेंज, ग्रीन व व्हाइट कैटेगरी में वर्गीकृत किया था। वायु प्रदूषण स्कोर को लेकर पेच फंसा तो सुप्रीम कोर्ट ने विजन डॉक्यूमेंट के संबंध में सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी से रिपोर्ट मांगी थी। बृहस्पतिवार को सीईसी सदस्य सीपी गोयल आगरा आए।
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मंडलायुक्त सभागार में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और भरतपुर के हित धारक विभागों संग बैठक की। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सभी हितधारकों ने उद्योग हित में सुझाव दिए हैं। रेड कैटेगरी को छोड़कर ऑरेंज, ग्रीन और व्हाइट कैटेगरी में उद्योगों को अनुमति दिए जाने का सुझाव दिया गया है। जिन उद्योगों का वायु प्रदूषण स्कोर 20 से कम है, उन उद्योगों की स्थापना पर सरकार भी सहमत है। करीब 200 उद्योग ऐसे हैं जिनमें वायु प्रदूषण कम है। इनकी स्थापना पर सुप्रीम कोर्ट में सुझावों पर सुनवाई और निर्णय होना है।
इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर पांच साल से बंद
लखनऊ एक्सप्रेस स्थित रहनकलां के पास उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने 1058 एकड़ भूमि इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के लिए चिह्नित किया है। अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर का यह हिस्सा है। टीटीजेड की बंदिशों के कारण पांच साल से आईएमसी प्रोजेक्ट अधर में फंसा है। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि आगरा के अलावा मथुरा, फिरोजाबाद व अन्य जगह भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। टीटीजेड में बंदिशों से राहत मिलने पर उद्योगों की स्थापना का रास्ता साफ हो सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट में रखे जाएंगे सुझाव, फिर होगा निर्णय
सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी हितधारकों के सुझावों को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करेगी। सुप्रीम कोर्ट में 11 नवंबर को सुनवाई होनी है। यदि सुप्रीम कोर्ट ने सुझावों को मान लिया तो टीटीजेड में भारी उद्योगों को छोड़कर करीब 200 प्रकार के लघु, मध्यम व सूक्ष्म उद्योगों की राह आसान हो जाएगी। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, टीटीजेड व अन्य विभाग उद्यमियों को अभी किसी भी वर्ग के लिए उद्योगों को अनुमति नहीं दे रहे हैं।
उद्योगों को विस्तार और निवेश हो रहा प्रभावित
टीटीजेड की बंदिशों के कारण इकाइयों में विद्युत भार नहीं बढ़ाया जा रहा जिस वजह से निवेश भी प्रभावित हो रहा है। मथुरा रिफाइनरी का विस्तार भी अटका है। आईएमसी सहित कई मेगा प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहे। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में आगरा में करीब तीन लाख करोड़ रुपये निवेश के प्रस्ताव आए थे जो टीटीजेड की बंदिशों, जमीन और अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण छिटक रहे हैं।