सीबी नेट प्रयोगशाला और खाली पड़ा एमडीआर वार्ड
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देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त करने में स्वास्थ्य विभाग जुटा है, इसके बावजूद जिले में टीबी से जुड़ी जांच एमडीआर (मल्टीड्रग रेसिस्टेंट) एक माह से बंद है। इसका कारण सीबी नेट मशीन चालू न होना बताया जा रहा है। जांच न होने से टीबी मरीजों में एमडीआर होने की पुष्टि नहीं हो पा रही है। इस कारण इलाज भी समय से शुरू नहीं हो पा रहा है। मेडिकल कॉलेज परिसर में बना एमडीआर वार्ड खाली है। इधर, टीबी के सामान्य मरीजों के लिए अस्पताल में भी दवाएं नहीं हैं। वार्ड में भर्ती सामान्य टीबी रोगी बाहर से दवाएं खरीदकर इलाज कराने को मजबूर हैं।
जिले में 3660 टीबी मरीज
जनपद में 3660 टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है। टीबी मरीजों का स्वास्थ्य गंभीर होने पर यह एमडीआर के रूप में बदल जाती है। वर्तमान में 162 एमडीआर रोगी जनपद में हैं। करीब एक माह से एमडीआर जांच नहीं हो पा रही है। सीबी नेट मशीन कब तक चालू हो सकेगी, इस बात से अधिकारी भी अंजान हैं। उधर, जिन मरीजों की तबीयत खराब हो जाती है, उनको वार्ड में भर्ती कर लिया जाता है। हालत यह है कि वार्ड में भर्ती सामान्य टीबी रोगी भी बाहर से दवाएं खरीदकर ला रहे हैं। तब जाकर सही इलाज मिल पा रहा है।
समाजसेवियों के भरोसे टीबी रोगी
जनपद में 1023 टीबी रोगियों को समाजसेवियों ने गोद ले रखा है। इसमें 220 बाल, 346 वयस्क महिला और 457 वयस्क क्षय रोगी हैं। 98 समाजसेवियों ने इन लोगों के खानपान और समय से दवा दिलाने की जिम्मेदारी ले रखी है।