मैनपुरी। सड़क हादसे में घायल युवक जिला अस्पताल में 18 घंटे तक दर्द से तड़पता रहा, लेकिन उसे इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया। शुक्रवार को मामला मीडिया में आया तो आनन फानन उसे भर्ती करके इलाज दिया गया। डॉक्टरों के रवैये से परिजनों में नाराजगी है।
थाना एलाऊ क्षेत्र के गांव रतनपुर बरा निवासी हरिश्चंद्र का 18 वर्षीय पुत्र अंकित बृहस्पतिवार की शाम गांव के पास ही हादसे में घायल हो गया था। परिजन उसे लेकर बृहस्पतिवार शाम छह बजे ही जिला अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उसे एक इंजेक्शन लगाने के बाद घर जाने के लिए कह दिया। अंकित ने सीने में दर्द होने की शिकायत की, लेकिन डॉक्टरों ने उसे भर्ती नहीं किया।
युवक की खराब हालत को देखते हुए परिजन भी उसे घर नहीं लाए। भाई शिवम ने बताया कि रातभर अंकित इमरजेंसी के बरामदे में दर्द से तड़पता रहा, लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया। खुद उसने कई बार इमरजेंसी में तैनात स्टॉफ से उसका इलाज करने और उसे भर्ती करने का अनुरोध किया। हर बार डॉक्टर ने यही कहा कि उसे मामूली चोट लगी है, घर ले जाओ। शुक्रवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दोपहर 12 बजे तक परिजन उसे लिटाए रहे। शुक्रवार को निजी डॉक्टरों की हड़ताल के चलते उसे प्राइवेट अस्पताल में भी इलाज नहीं मिला। सिर्फ उसका एक्सरे ही हो सका। शुक्रवार दोपहर पत्रकारों को जब जानकारी हुई तब जाकर युवक को भर्ती किया गया।
पहले भी सामने आए हैं इस तरह के मामले
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। बीते वर्ष 21 नवंबर को इसी तरह युवक इमरजेंसी के बाहर दर्द से तड़पता रहा, लेकिन उसे इलाज नहीं दिया गया। महिला अस्पताल में प्रसूता को भर्ती नहीं किया गया। इससे उसका प्रसव अस्पताल के बाहर ही हो गया।
गंभीर रूप से घायल युवक के साथी को भर्ती कर लिया गया था। युवक को मामूली चोट थी, प्राथमिक उपचार के बाद घर ले जाने को कहा था। परिजन उसे घर नहीं ले गए। इसके बाद जानकारी मिलने के बाद उसे भर्ती कराने के आदेश दिए गए हैं।
डॉ.आरके सागर, सीएमएस