आगरा। नेशनल आइसस्टॉक प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए राजस्थान की पहली ट्रांसजेंडर खिलाड़ी रितिका बृहस्पतिवार को आगरा पहुंचीं। खेल उपलब्धियों के बावजूद रितिका समाज की दोहरी सोच से आहत हैं। उन्होंने बताया कि ट्रांसजेंडर समुदाय को शिक्षा, मेडिकल और अन्य सेक्टर में अवसर तो मिल रहे हैं, लेकिन स्वीकार्यता अब भी बड़ी चुनौती है।
रितिका के साथ टीम में दो और ट्रांसजेंडर खिलाड़ी नंदिनी और अवनी भी हैं। तीनों राजस्थान से हैं। रितिका राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा की रहने वाली हैं और पिछले दो साल से आइसस्टॉक खेल रही हैं। वह 2023 के समर आइसस्टॉक में सिल्वर मेडलिस्ट रह चुकी हैं। फरवरी 2024 में गुलमर्ग में आयोजित विंटर आइसस्टॉक में उन्होंने गोल्ड मेडल भारत के नाम किया।
रितिका ने बताया कि शुरुआत में उन्हें राजस्थान की आइसस्टॉक की पुरुष टीम में रखा गया। उन्होंने इसका विरोध किया तब महिला टीम में शामिल किया गया। वहां भी खिलाड़ियों ने आपत्ति जताई। आखिरकार समाधान यह निकला कि उन्हें और ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को पुरुष और महिला खिलाड़ियों के साथ अलग-अलग जोड़ दिया गया। दस्तावेज पूरे कराने से लेकर टीम में सामंजस्य बैठाने तक हर कदम पर कठिनाइयां सामने आती हैं।
उन्होंने कहा कि समाज की सोच बदलना अब भी कठिन है। हम खेलों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं लेकिन ड्रेसिंग रूम जैसी सामान्य जगहों पर भी सहज माहौल नहीं मिल पाता है। सामान्य खिलाड़ी हमारे बीच सहज नहीं हो पाते। हमें अलग नजर से देखा जाता है। यह समझना चाहिए कि हम डिफरेंट हैं, एब्नॉर्मल नहीं। आम लोग इस बात से डरते हैं कि कहीं ट्रांसजेंडर खिलाड़ी उन्हें पीछे न छोड़ दें। उन्होंने बताया कि राजस्थान में हमें बढ़ावा दिया जाता है। खेल में ही हमें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास है।