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ट्रेनें भरेंगी फर्राटा तो ओवरलोड हो जाएगा कासगंज का टीएसएस

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कासगंज। कासगंज-बरेली रेलमार्ग पर विद्युतीकरण के काम का सीआरएस निरीक्षण कर चुके हैं। उनकी हरी झंडी मिलते ही ट्रेनें और मालगाड़ियां इलेक्ट्रिक इंजन से दौड़ेंगी। इस ट्रैक की विद्युत आपूर्ति कासगंज में बनाए गए टीएसएस(ट्रैक्शन सब स्टेशन) से दी जाएगी, लेकिन दूर ज्यादा होने के कारण ट्रेन और मालगाड़ियां दौड़ने के दौरान कासगंज टीएसएस ओवरलोड हो जाएगा। इसी के चलते रेलवे अब बदायूं में टीएसएस बनाएगा।
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रेलवे के विद्युुतिकृत ट्रैक पर ट्रैक्शन सब स्टेशन निर्धारित दूरी पर क्षमता के अनुसार बनाए जाते हैं। कासगंज से बरेली के बीच वैसे तो जगह जगह मिनी सब स्टेशन हैं, लेकिन ट्रैक्शन सब स्टेशन कासगंज में ही है। जबकि एक ट्रैक्शन सब स्टेशन 70 किलोमीटर तक विद्युत ट्रैक पर आपूर्ति देने की क्षमता रखता है। 35 किलोमीटर ट्रैक की दाईं तरफ और 35 किलोमीटर ट्रैक की बायीं तरफ की क्षमता होती है।
कासगंज से बरेली का ट्रैक सौ किलोमीटर लंबा है। इस ट्रैक पर कासगंज के टीएसएस से आपूर्ति देकर रेलवे ने सीआरएस स्पेशल ट्रेन तो दौड़ा दी, लेकिन जब नियमित ट्रेेनें और मालगाडियां दौड़ेंगी तो यह टीएसएस ओवरलोड हो जाएगा। ऐसे में रेलवे ने बदायूं में एक और टीएसएस बनाया जाएगा। इसके अलावा बदायूं में ही टॉवर वैगन यार्ड और कर्मचारियों के लिए डिपो भी तैयार होगा। यह सभी निर्माण कार्य रेल विकास निगम लिमिटेड से कराए जा रहे हैं।
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तो पीलीभीत का टीएसएस भी देगा इस ट्रैक को आपूर्ति
बदायूं में बनने वाला टीएसएस कासगंज और बरेली ट्रैक के दोनों क्षेत्रों को कवर करेगा। बरेली से कासगंज का कुछ ट्रैक ऐसा भी है जहां तक क्षमता के अनुसार बदायूं का टीएसएस भी आपूर्ति नहीं दे पाएगा। ऐसे में रामगंगा से पहले कुछ सीमा तक कासगंज की ओर पीलीभीत के टीएसएस की आपूर्ति मिलेगी।
बदायूं में टीएसएस बनाया जाएगा। ताकि ट्रेन दौड़ने के दौरान कासगंज के टीएसएस पर ओवरलोड न रहे। कासगंज के टीएसएस से कानपुर और मथुरा को भी आपूर्ति मिलती है। इसलिए बदायूं में टीएसएस जरूरी है। - कृष्णमोहन विश्वकर्मा, प्रबंधक, रेल विकास निगम लिमिटेड।
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