आगरा के ताजगंज की हलवाई गली में प्रदीप अरोरा अपनी पुश्तैनी चंदा पंसारी के नाम से चलाते थे। 500 मीटर के दायरे में व्यापारिक गतिविधियां बंद करने के आदेश के बाद से ही वह तनाव में थे। उन्हें दुकान बंद होने की चिंता सता रही थी। मंगलवार को दुकान पर ही इस मामले की चर्चा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी। अस्पताल ले जाते वक्त मृत्यु हो गई। परिजनों का कहना है कि व्यापार छिन जाने के डर से वह कई दिनों से तनाव में चल रहे थे, इससे ही उन्हें हृदयाघात हुआ है।
परिवार के लोगों का कहना हैं कि प्रदीप बेटी की शादी को लेकर चिंतित थे। घर में जनवरी में होने वाली शादी की तैयारियां चल रही थीं। दुकानों को हटाने के आदेश के बाद से ही वह परेशान हो गए थे। उनके परिवार का सहारा भी एक दुकान मात्र हैं। प्रदीप की मौत से परिवार पर आर्थिक संकट आ गया हैं। पत्नी मंजू अरोरा और मां विद्या देवी के आंसू नही रुक रहें हैं। उन्हें परिवार के लोग ढांढस बंधा रहे हैं।
व्यापार चले जाने से सदमे में आए प्रदीप अरोरा की मौत के बाद बाजार में दुकानदारों में आक्रोश हैं। उनका कहना है कि उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा हैं। अपनी रोजी रोटी छिन जाने से खतरा सभी तनाव में हैं। परिवार का सहारा एकमात्र दुकान ही होती हैं। और वही चली जाएगी तो परिवार कहां जाएगा। शासन प्रशासन के अधिकारी भी कोई सुनवाई नही कर रहे हैं।