ताजमहल पर सैलानियों की संख्या हर दिन 40 हजार तक सीमित करने और गुंबद के लिए अलग से टिकट लगाने के प्रस्ताव पर अगर अमल कर लिया गया तो हर साल 40 लाख सैलानियों की संख्या कम हो जाएगी।
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इससे पर्यटन कारोबार को बड़ा झटका लग सकता है। इसी के चलते नई व्यवस्था का विरोध भी शुरू हो गया है। इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक जाने की चेतावनी दी गई है। सबसे ज्यादा नाराजगी टिकट महंगा किए जाने की है।
ताज पर दो साल बाद 2017 में सैलानियों की संख्या बढ़ी थी और करीब 1.80 करोड़ सैलानियों ने सातवें अजूबे को निहारा था, लेकिन प्रस्ताव पर अमल हुआ तो हर साल अधिकतम 1.46 करोड़ सैलानी ही ताज देख सकेंगे।
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ताजमहल पर बीते साल करीब 80 लाख टिकटों की बिक्री पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी गेट के टिकट काउंटर से हुई है। 15 साल तक के बच्चों का प्रवेश नि:शुल्क होने से करीब इतनी ही संख्या और बढ़ गई।
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
ऑनलाइन टिकटों का आंकड़ा एएसआई ने कभी जारी नहीं किया, लेकिन वीक एंड और भीड़ के दिनों में हर दिन 20 हजार टिकट ऑनलाइन भी बेचे जा रहे हैं। इस तरह सालाना करीब 20 लाख टिकट ऑनलाइन भी जारी हो रहे हैं।
इन सभी को मिला दें तो ताज पर हर साल करीब 1.80 करोड़ सैलानी पहुंच रहे हैं, जिनमें वीवीआईपी, प्रशासन, पुलिस और नि:शुल्क प्रवेश करने वाले शामिल नहीं है। हर दिन 40 हजार पर्यटकों की संख्या सीमित करने से ताज पर हर महीने 12 लाख और हर साल करीब 1.46 करोड़ पर्यटक ही अधिकतम आ सकेंगे।
रेलिंग की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी
ताजमहल
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
ताजमहल के मुख्य गुंबद में एएसआई ने दीवारों को गंदा होने से बचाने के लिए स्टील की रेलिंग लगाई है। इस रेलिंग के कारण ही सबसे ज्यादा दिक्कतें हुई। मंत्रालय में जब यह मुद्दा उठा तो एएसआई ने रेलिंग की चौड़ाई बढ़ाने पर सहमति जताई। रेलिंग की चौड़ाई उतनी ही बढ़ाई जाएगी, जिससे पर्यटक ताज की दीवारें छूकर गंदा न कर सकें।
ताज में टर्न स्टाइल गेट से होगा प्रवेश
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
ताजमहल में टर्न स्टाइल गेट से प्रवेश के लिए जल्द मशीनें भेजने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि इन्हें पूर्वी और पश्चिमी गेट पर ही लगाया जाएगा। दक्षिणी गेट जल्द ही बंद होने के कारण इस गेट के लिए टर्न स्टाइल गेट खरीदे ही नहीं गए हैं। पूर्वी गेट पर रेवती के बाड़े और पश्चिमी गेट पर टिकट काउंटर के पास फैसिलिटी सेंटर बनने के बाद ही टर्न स्टाइल गेट से प्रवेश की व्यवस्था लागू होगी।
ताजमहल पर वीक एंड, क्रिसमस से नए साल तक की छुट्टियों, होली, दिवाली, रक्षाबंधन और दशहरे की छुट्टियों में ही 40 हजार से ज्यादा सैलानी आते हैं। बाकी दिनों में ताज पर पर्यटकों की संख्या 40 हजार से कम ही रहती है, लेकिन भीड़ प्रबंधन की आड़ में एएसआई टिकट दर बढ़ाने और गुंबद पर सीमित प्रवेश के अपने सुझाव पर अमल करा रहा है।
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान का कहना है कि टिकट की संख्या सीमित करने और गुंबद पर अलग से टिकट एक साथ लगाए गए तो हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। पहले भी हमने कोर्ट के जरिए ताज का टिकट कम कराया है। अधिकारी भीड़ प्रबंधन के नाम पर आगरा के पर्यटन को झटका दे रहे हैं। वह व्यवस्थाएं सुधारें न कि अजीबोगरीब अव्यावहारिक कदम उठाएं।
होटल एंड रेस्टोरेंट आनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश वाधवा का कहना है कि ताज पर अलग से टिकट लगाने का कोई औचित्य नहीं है। पर्यटकों की संख्या कम से कम 60 हजार होनी चाहिए। अभी एक लाख सैलानियों में परेशानी है, लेकिन 60 हजार तक पर्यटकों की सिफारिश तो नीरी ने भी की है। ताज के नाम से ही पर्यटन है, इसे प्रोत्साहन की जरूरत है।