समिति ने कहा कि इससे टोरंट पावर को 2023-24 में 800 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ, जबकि पावर कॉरपोरेशन को एक साल में 275 करोड़ रुपये की हानि हुई है। समिति ने अध्यक्ष को बताया कि एक अप्रैल 2010 को शहरी क्षेत्र का निजीकरण कर टोरंट पावर को सौंपा गया। कम दर पर बिजली बेचने से 14 साल में 2434 करोड़ का नुकसान हो चुका है। टोरंट ने निजीकरण के समय निर्धारित सरकारी बकाया 2200 करोड़ रुपये 15 साल बाद भी नहीं लौटाए हैं। किसानों को मुफ्त बिजली नहीं दी जा रही है।
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राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश वर्मा ने कहा कि टोरंट जनता को बेवकूफ बना रही है। टोरंट को 2016-17 तक एग्रीगेट टेक्निकल लॉसेस 15% करना था। उसका ऑडिट होना चाहिए। विद्युत वितरण संहिता का उल्लंघन हो रहा है। गलत एस्टीमेट व मनमानी बिल वसूला जा रहा है। 2020 में जांच रिपोर्ट में टोरंट दोषी पाई गई लेकिन उसकी फाइलें दबा दी गईं। किसान नेता पुष्पेंद्र सिंह ने टोरंट का अनुबंध समाप्त करने की मांग उठाई। आरडब्ल्यूए से जीपी अग्रवाल ने निजी कंपनी पर मनमानी और उपभोक्ताओं की सुनवाई नहीं करने के आरोप लगाए।
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