ताजमहल के उत्तर दिशा में मौजूद कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर जमा 8.50 लाख मीट्रिक टन कूड़े के पहाड़ को खत्म करने की कवायद शुरू हो चुकी है। कुबेरपुर साइट पर 27 करोड़ रुपये की लागत से यह कचरा हटाया जाएगा।
ड्रोन कैमरों से लैंडफिल साइट पर जमा कचरे की मात्रा को मापा जा चुका है। अब दो अक्तूबर से पहले यहां मशीनों से काम शुरू किया जाएगा। एक साल के अंदर कचरे का पहाड़ कैपिंग और बायो माइनिंग के जरिए खत्म करने का दावा नगर निगम ने किया है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) मॉनीटरिंग कमेटी की रिपोर्ट में की गई संस्तुति के मुताबिक नगर निगम कुबेरपुर लैंडफिल साइट की पांच एकड़ सेनेटरी लैंडफिल जमीन पर जमा कचरे की कैपिंग कर पंचवटी पार्क बना रहा है।
इसके पास 37 एकड़ में मौजूद पुराने कचरे के पहाड़ की बायो माइनिंग की जाएगी। इसकी बायो माइनिंग कर तीन कैटेगरी में वेस्ट निकलेगा, जिसमें कंपोस्ट, आरडीएफ और जमीन भरने योग्य मैटेरियल निकलेगा। सरकारी नए प्रोजेक्ट में मिट्टी के भराव की जगह इसी का इस्तेमाल जगह किया जाएगा। आरडीएफ बॉयलर या वेस्ट टू एनर्जी प्लांट भेज दिया जाएगा।
प्रदेश में पहला शहर, जहां कैपिंग, बायो माइनिंग एक साथ
प्रदेश में आगरा पहला ऐसा शहर है, जहां लैंडफिल साइट पर एक साथ कै पिंग और बायो माइनिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बंगलुरू, सूरत, बड़ोदरा जैसे शहर बायो माइनिंग के जरिए कचरे का निस्तारण कर रहे हैं।
आगरा में शाहदरा लैंडफिल साइट की कैपिंग 2010 में की गई थी, लेकिन गैसों के निकलते रहने के कारण यहां लगाए पौधे जल गए। इसी वजह से कुबेरपुर में बायो माइनिंग और बायो री-मेडिएशन का विकल्प एक साथ अपनाया गया। भारत सरकार, प्रदेश सरकार और नगर निगम तीनों ही इस प्रोजेक्ट में वित्तीय सहायता दे रहे हैं।
कुबेरपुर से कूड़े के पहाड़ को खत्म करने की दिशा में प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ड्रोन से सर्वे कर मात्रा मापी गई है। इसी महीने से मशीनों से काम शुरू हो जाएगा। एक साल में हम यहां कचरे का पहाड़ खत्म करने के साथ पांच एकड़ में पंचवटी पार्क बना देंगे। दुर्गंध और प्रदूषण से यहां के लोगों को मुक्ति मिलेगी। -राजीव कुमार राठी, पर्यावरण अभियंता, नगर निगम