मैनपुरी। मृदा की उर्वरा शक्ति तेजी के साथ कम हो रही है। इसे सुधारने के लिए हरी खाद एक बेहतर विकल्प है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक नरेंद्र कुमार वर्मा ने ऑनलाइन एडवाइजरी जारी की। उन्होंने किसानों से हरी खाद के रूप में ढेंचा की बुवाई करने की सलाह दी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक नरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि हरी खाद के रूप में ढेंचा की फसल सबसे बेहतर है। वर्तमान में गेहूं की कटाई के बाद खेत खाली हैं। ऐसे में हरी खाद के रूप में किसान ढेंचा की बुवाई करें। उन्होंने बताया कि 55 से 60 दिनों में ढेंचा की फसल की जोताई कर मृदा को हरी खाद दी जा सकती है। इससे मृदा में जीवांश कार्बन और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। उन्होंने बताया कि इसके लिए किसान खेत की एक बार जोताई कर पर्याप्त नमी में 50 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से ढेंचा की बुवाई कर सकते हैं। इसके लिए बाजार में पंजाबी ढेंचा, हिसार ढेंचा, पंत ढेंचा और सीएसडी 137 आदि प्रजातियां उपलब्ध हैं। इन प्रजातियों की बुवाई किसान कर मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ा सकते हैं।