मिट्टी की जांच और उन्नत बीज से मुनाफे का सौदा बनी खेती
खंदौली के हसनपुर गांव निवासी माधवेंद्र सिंह भी उन्नतीशील किसान हैं। इन्होंने बताया कि वह 80 एकड़ से अधिक जमीन पर आलू की फसल कर रहे हैं। कृषि विज्ञानियों के संपर्क में आने के बाद उन्होंने भी वैज्ञानिक तरीके से खेती करना शुरू किया। मिट्टी की जांच कराके सही मात्रा में खाद दी।
उन्होंने देसी खाद को ही प्राथमिकता दी। उन्नत किस्म का बीज खरीदकर बुवाई की। इससे साल दर साल पैदावार लगभग दोगुनी हुई। अच्छी गुणवत्ता का आलू भी हुआ, इसे मुंबई, पुणे, हैदराबाद समेत 10 राज्यों की मंडी में उनका आलू हाथों-हाथ बिकता है और कीमत भी अच्छी मिलती है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामप्रवेश वर्मा ने बताया कि मिट्टी में अंधाधुंध खाद-कीटनाशक से पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। ऐसे में मिट्टी की जांच कर पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलने के बाद उसी के अनुपात में खाद और बीज डाला जाता है। उन्नत किस्म के बीज, बीमारियों से बचाने, उसकी गुणवत्ता की जांच करने के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को प्रशिक्षण और जानकारी देते हैं। समय-समय पर खेती का सर्वे भी करते हैं।