राजकीय बाल शिशु गृह में मिला जितेंद्र
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आगरा के राजपुर चुंगी निवासी आटो चालक नीरज चौहान की मेहनत से दस वर्षीय मंदबुद्धि मासूम जितेंद्र तीन साल बाद अपने परिवार से मिल सका। 2015 में जितेंद्र घर के बाहर खेलते समय निकल गया था।
तभी से परिवार उसकी तलाश में दर-दर भटक रहा था। इधर बालक तीन साल से राजकीय बाल शिशु गृह में रह रहा था। सोमवार को बाल शिशु गृह के अधिकारियों ने बच्चे को माता-पिता के सुपुर्द किया।
राजपुर चुंगी निवासी बृजेश तिवारी कपड़े की दुकान पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि बेटा बोलने और सुनने में असमर्थ है। परिवार में पत्नी अनीता तिवारी और एक बड़ा बेटा है।
सभी सदस्यों बेटे जितेंद्र की बहुत तलाश की लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल सका। बेटे के लापता होने के दुख में माता अनीता का भी बुरा हाल हो गया था। जितेंद्र का बड़ा भाई भी मंदबुद्धि है।
बाल कल्याण न्यायालय की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट लता गुप्ता ने बताया कि जितेंद्र ग्राम बगदा, बरौली अहीर के पूर्व प्रधान बहादुर सिंह के यहां पहुंच गया था।
उन्होंने कुछ दिन बच्चे को अपने पास रखा और उसके परिवार की तलाश की थी। परिजन नहीं मिलने पर उन्होंने बच्चे को राजकीय बाल गृह शिशु आगरा के अधीन किया था।
बाल कल्याण समिति आगरा ने बच्चे की कई बार काउंसलिंग की और भी घर तलाश भी कराया था। राजकीय बाल गृह में बच्चे का नाम मुन्ना रखा गया था।
न्यायिक मजिस्ट्रेट को घर छोड़ता है आटो चालक
ऑटो चालक नीरज चौहान की बहन जितेंद्र के घर के पड़ोस में रहती है। बहन के घर जाने के दौरान ही जितेंद्र के पिता बृजेश तिवारी ने उन्हें बच्चे की फोटो देकर तलाश करने में मदद की गुहार लगाई थी।
इधर, आटो चालक न्यायिक मजिस्ट्रेट लता गुप्ता को घर से ऑफिस ले जाता है। तभी उसने लता गुप्ता को बच्चे की तस्वीर दिखाई। लता गुप्ता ने रजिस्ट्रर निकलवाकर फोटो का मिलान किया। तस्वीर मिलने पर बच्चे को ऑफिस में बुलाया।
बच्चे के बाल गृह में होने की जानकारी नीरज ने उसके माता-पिता को दी। सोमवार को वह बाल गृह आए। जितेंद्र को देख मां-बाप की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
लता गुप्ता ने कागजी कार्रवाई पूरी कर जितेंद्र को उनके सुपुर्द कर दिया। मां-बाप ने ऑटो चालक, बाल गृह और समिति के लोगों को धन्यवाद कहा। बाल कल्याण न्यायालय के अध्यक्ष गोपाल शर्मा, आशा गुप्ता आदि मौजूद रहीं।