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आगरा में मौत की पोखर: तीन वर्षीय मासूम की डूबने से गई जान, इकलौते बेटे की मौत से सदमे में घरवाले

Sat, 12 Sep 2026 01:38 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के मधुनगर क्षेत्र में पोखर में गिरने से तीन वर्षीय हृदयांश की मौत हो गई। तेज हवा के झोंके से संतुलन बिगड़ने के बाद वह पोखर में गिर गया था। एसएन मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम गृह पर बेटे का शव गोद में लेकर मां दहाड़ें मारकर रोती रही।
 
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तीन वर्षीय मासूम की डूबने से गई जान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के सदर के नगला अफोए क्षेत्र में सड़क किनारे बने तालाब ने तीन वर्षीय बालक की जान ले ली। घर से वह खेत में शौच के लिए गया था। परिजन को अंदेशा है कि पैर फिसलने से वह तालाब में डूब गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने तालाब के बाहर बालक की चप्पल देख उसे बाहर निकाला। एसएन मेडिकल काॅलेज पहुंचने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं पोस्टमार्टम न कराने पर अड़े परिजन से पुलिस की बहस भी हुई। बाद में समझाकर पोस्टमार्टम कराया गया।
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सदर के सीओडी के पास नगला अफोए निवासी नारायण कुशवाह उर्फ कृष्णा और उनकी पत्नी गुजरात में लोअर टीशर्ट बनाने की फैक्टरी में काम करते हैं। उनका तीन वर्षीय बेटा हृदयांश दादा-दादी और ताऊ-ताई के साथ रहता था। दादी गुड़िया ने बताया कि पौत्र सुबह 10:30 बजे शौच के लिए घर के पास खेत गया था। 11 बजे तक नहीं लौटने पर सभी खोजने निकले। पता नहीं चलने पर पुलिस को सूचना दी।

पुलिस को सड़क किनारे खुले तालाब के किनारे पौत्र की चप्पल दिखी। तालाब में काफी गंदगी थी। उसमें रस्सी के बीच फंसे पौत्र के पैर दिख गए। पुलिस ने काफी मशक्कत कर उसे बाहर निकाला। मौके पर भीड़ जुट गई। दादी गुड़िया बच्चे को सीने से लगाकर एसएन मेडिकल कॉलेज भागीं। वहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जैसे ही पोस्टमार्टम कराने को कहा गया तो परिजन रोने लगे। पोस्टमार्टम नहीं कराने पर अड़ गए। बच्चे के माता-पिता दो दिन पहले ही गुजरात के राजकोट के लिए निकले थे। घटना की सूचना पर वह वहां से चल दिए हैं। घटना की सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी पोस्टमार्टम गृह पहुंच गए। हादसे की रिपोर्ट बनाकर जिलाधिकारी को दी जाएगी।
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पौत्र को घंटों सीने से चिपकाए रहीं दादी
हादसे के बाद मेडिकल कॉलेज आने तक परिवार को बच्चे के ठीक होने की उम्मीद थी। हृदयांश की दादी उसे खुद ऑटो से लेकर एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। वह बच्चे को सीने से चिपकाए रहीं। चिकित्सकों ने मृत घोषित किया तो भी उन्होंने बच्चे को नहीं छोड़ा। अन्य परिजन भी रोने लगे। दादी बच्चे को दुलारते और रोते हुए बार-बार उसे उठने के लिए कह रही थीं। पोस्टमार्टम की बात सुनते ही वह कुछ समय के लिए बेसुध हो गईं। होश आने पर बच्चे का शरीर बचा रहने देने की गुहार लगाने लगीं। उन्होंने बताया कि शादी के बाद नारायण के औलाद नहीं हो रही थी। जाने कितनी मन्नतें मानीं। कहां-कहां इलाज कराया। इसके बाद हृदयांश का जन्म हुआ। वह पूरे परिवार की आंख का तारा था।

पूर्व के हादसों से नहीं लिया सबक
क्षेत्रीय निवासी राजकुमार ने बताया कि तालाब सड़क किनारे पर है। तालाब में गंदगी का अंबार है। आसपास कोई चहारदीवारी नहीं है। तालाब पर किनारों पर फेंसिंग भी नहीं की गई है। पूर्व में भी यहां हादसे हो चुके हैं। वहीं स्थानीय निवासी मोनू का कहना था कि क्षेत्र के लोगों ने प्रधान को कई बार शिकायत की पर कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रशासनिक अधिकारियों को भी अवगत कराया जा चुका है लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

बच्चे के लापता होने की सूचना पर पुलिस पहुंची थी। तालाब से बच्चे को निकाल कर इलाज के लिए भेजा गया। चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। जांच की जा रही है। -अमीषा सिंह, एसीपी सदर
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