एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) में शहर के तीन उद्यम शामिल होने वाले हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग ने प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अगले साल ओडीओपी में शामिल होने की उम्मीद है। इससे व्यापार बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे।
एमएसएमई के संयुक्त आयुक्त अनुज कुमार ने बताया कि चांदी की पायल, ब्रश उद्योग और जरदोजी कला को ओडीओपी में शामिल करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। इनकी जियो टैगिंग भी कराई जाएगी। इस संदर्भ में शासन का भी सकारात्मक रुख है और अगले साल सौगात मिलने की उम्मीद है। अभी आगरा से पेठा, फुटवियर और स्टोन एंड मार्बल हैंडीक्राफ्ट ही ओडीओपी में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि नए उद्यमों के शामिल होने से रोजगार के अवसर तेजी से विकसित होंगे। ओडीओपी में शामिल होने से संबंधित उद्यम के लिए सरकार की वित्तीय योजनाओं का लाभ मिलेगा। कॉमन फैसिलिटी सेंटर की सुविधा, अनुदान और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां तक कि एमएसएमई की ओर से देशभर में होने वाले ट्रेड फेयर में स्टॉल लगाने और आवागमन के किराये समेत 75 फीसदी की छूट भी मिलने लगेगी।
चांदी की पायल का पूरे देश में व्यापार
आगरा सराफा मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजमोहन रैपुरिया ने बताया कि चांदी की पायल का उद्यम आगरा में तेजी से बढ़ रहा है। पूरे देश में व्यापार होता है। ओडीओपी में शामिल होने से चांदी की पायल के उद्यम को बढ़ावा मिलेगा और व्यवस्थित ढंग से व्यापार होगा। अनुदान से युवाओं का भी रुझान बढ़ेगा।
निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
लघु उद्योग भारती के महामंत्री राजीव बंसल ने बताया कि टीटीजेड की बाध्यता के कारण कई उद्यम बंदी की कगार पर हैं। जरदोजी, पायल और ब्रश ओडीओपी में शामिल होने से देश और दुनिया में प्रोडक्ट को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
तकनीक का मिलेगा लाभ
ब्रश एंड क्लीनिंग प्रोडक्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित मोरयानी ने बताया कि ओडीओपी में उद्यम शामिल होने से नई तकनीक और मशीनों की सुविधा मिलेगी। इससे दूसरे देशों पर निर्भरता नहीं रहेगी। आधुनिक तकनीक से कर्मचारी प्रशिक्षित हो सकेंगे। इससे निर्यात भी बढ़ेगा। - ,
अभी ये परेशानियां
- चांदी की पायल के निर्यात के लिए ठोस व्यवस्था नहीं है।
- ब्रश इंडस्ट्रीज के लिए सरकारी अनुदान नहीं मिल रहा है।
- जरदोजी के उत्पादों का निर्यात के लिए प्रयास कम है।
- कारीगरों को प्रशिक्षण देने के लिए ट्रेनिंग सेंटर नहीं है।
- तकनीक और प्रशिक्षित कर्मचारियों का अभाव है।
- कॉमन फैसिलिटी सेंटर की सुविधा नहीं मिल रही है।