समयबद्धताः प्रोजेक्ट में सभी कार्यों की समय-सीमा तय हो। जैसे एडीबी (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) में ताजगंज एरिया को लिया गया है। इसमें भी सबसे पहले रिट्रोफिटिंग काम करना है। इसे तय समय-सीमा में ही खत्म किया जाए।
प्रायोगिकताः शहर की भौगोलिक, सामाजिक और संस्कृति को देखते हुए विकास करना, न कि दूसरे देशों या राज्यों के अनुरूप स्मार्ट सिटी बनाना है।
मेजरमेंटः स्मार्ट सिटी में ऐसे काम करने हैं, जिनका मेजरमेंट (नापतौल) हो सके। इससे गुणवत्ताऔर कार्य की पहचान हो सके। ये विकास कार्य में करने होंगे।
पहली ही सीढ़ी में फेल
स्मार्ट सिटी बनने को लेकर पहले ही फार्मूले पर आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड फेल हो गया है। स्मार्ट सिटी में शामिल होने को दो साल बीत रहे हैं लेकिन धरातल में एक भी काम पूरे नहीं हो सके हैं। अभी-भी कामकाज कागजों पर ही चल रहा है। ऐसे में पांच साल में कामों को पूरा करना चुनौती है।