फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजकीय बालगृह में दो दिन में तीन शिशुओं की मौत, प्रबंधन सप्ताहभर तक दबाए रहा मामला

Sun, 01 Nov 2020 09:17 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • 24-25 अक्तूबर को मासूमों ने तोड़ा दम, बीते माह के निरीक्षण में पोषण और देखभाल पर उठे थे सवाल
  • राजकीय बालगृह प्रबंधन सप्ताहभर से इस मामले का दबाए हुए था। 
विज्ञापन
बालगृह में बच्चों को खाना खिलाती आया - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगरा के राजकीय बालगृह (शिशु) सिरौली में दो दिन के अंदर तीन नवजात बच्चों की मौत हो गई। बालगृह प्रबंधन इस मामले को सप्ताहभर से दबाए हुए था। शनिवार को इस मामले का खुलासा हुआ तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। 

विज्ञापन


24-25 अक्तूबर को चार माह की बच्ची सुनीता ने बालगृह से अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया, जबकि तीन माह की नवजात प्रभा भर्ती होने के 24 घंटे और दो माह की अवनी की भर्ती होने के चार घंटे बाद जान चली गई। 


इन बच्चों को उपचार के लिए पहले जिला अस्पताल भेजा गया। बाद में एसएन मेडिकल कालेज रेफर किया गया। महज 48 घंटे के अंदर तीन शिशुओं की मौत से बालगृह में मासूमों की देखभाल और पोषण पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 

विज्ञापन

18 सितंबर को हुआ था निरीक्षण

धनौली-जगनेर रोड स्थित राजकीय बाल गृह में एक महीने पहले 18 सितंबर को निरीक्षण समिति के अध्यक्ष और अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सर्वजीत कुमार सिंह ने जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) को निरीक्षण के बाद रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें बच्चों के पोषण पर सवाल उठाए गए थे। 

निरीक्षण के 36 दिन बाद ही दो दिन के अंदर तीन बच्चों की मौत हो गई। बालगृह के अधीक्षक विकास कुमार का कहना है कि बच्चे प्री-मैच्योर थे और अचानक मौसम बदलने, ठंड आने से उनकी तबियत खराब हो गई थी। 

'ठंड से बिगड़ी तबियत'

राजकीय बाल शिशु गृह के अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि तीनों बच्चे प्री मैच्योर थे, अचानक मौसम बदला तो ठंड से उनकी तबियत खराब हो गई। उस दिन मैं मौजूद नहीं था, इसलिए दूसरे कर्मचारी ने निरीक्षण समिति को लेक्टोजन पाउडर व खरीद रजिस्टर नहीं दिखाया।
विज्ञापन

'डीपीओ से कहता हूं वो आपसे बात करेंगे...'

एडीएम सिटी डॉ. प्रभाकांत अवस्थी ने कहा कि तीन बच्चों की मौत हुई है। मामला मेरी जानकारी में है। हमें तो यही बताया है कि बच्चे प्री मैच्योर थे। सिटी मजिस्ट्रेट शेल्टर होम प्रभारी हैं आप उनसे बात कर लीजिए। मैं डीपीओ से कहता हूं। वो आपसे बात करेंगे।

'हमें कुछ नहीं बताते डीपीओ...'

सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार ने कहा कि मैं कोई प्रभारी नहीं हूं। जब कोई फाइल आती है तब देखता हूं। डीपीओ हमें कोई बात नहीं बताते। बच्चों की मौत कैसे हुई मुझे नहीं पता। अब आपने बताया है तो मैं मामले की जांच करूंगा।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें