घने बाजार, गली मोहल्लों में लापरवाही करा सकती है बड़ा हादसा।
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आगरा में हजारों जूता कारखाने, गोदाम और कई शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बिना फायर एनओसी और पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के संचालित हो रहे हैं। घने बाजारों और रिहायशी इलाकों में ज्वलनशील सामग्री के बीच चल रहे इन प्रतिष्ठानों में एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े अग्निकांड का कारण बन सकती है।
आगरा में कई शाॅपिंग काॅम्प्लेक्स, गोदाम और कारखाने बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। इनमें एक चिंगारी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। घने बाजारों से गली-मोहल्लों में संचालित जूता कारखानों में आग बुझाने के इंतजाम तक नहीं है। कई बार अग्निकांड होने के बाद अग्निशमन विभाग चेकिंग अभियान तो चलाता है मगर कुछ दिन बाद ही सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है।
शहर में आठ हजार से ज्यादा छोटे-बड़े जूता कारखाने संचालित किए जा रहे हैं। इनमें शाहगंज, रकाबगंज, मंटोला, कोतवाली, सदर बाजार, ट्रांस यमुना इलाकों में घर-घर में जूता कारखाने चल रहे हैं। जूता बनाने का सामान, अत्यंत ज्वलनशील केमिकल के गोदाम भी हैं। अग्निशमन विभाग की ओर से किसी तरह का ऑडिट नहीं कराया जाता है। फायर एनओसी भी नहीं ली जाती है। इन गोदाम और कारखानों में कई बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।
इसी तरह हींग की मंडी बाजार में एक दर्जन से अधिक व्यावसायिक भवनों में जूते के गोदाम और दुकानें चल रही हैं। आग बुझाने के इंतजाम इक्का-दुक्का जगह ही मिलेंगे, वह भी महज खानापूर्ति के लिए हैं। इसी तरह किनारी बाजार, सराफा बाजार, दवा बाजार में कई काॅम्प्लेक्स बन गए हैं। करीब दो साल पहले हॉस्पिटल रोड स्थित सिंधी बाजार की कपड़ा मार्केट में आग लगी थी। बमुश्किल काबू पाया गया था। सिंधी बाजार में कई दुकानों को बहुमंजिला शोरूम में बदल दिया गया है, जिनकी सीढि़यां इतनी संकरी है कि एक बार में एक ही व्यक्ति चढ़ या उतर सकता है। इसके साथ ही कोतवाली स्थित चाैबेजी का फाटक के सामने एक चांदी गलाई के कारखाने में भीषण आग लगी थी।