नौकरी मिलने से मिल गई नई ऊर्जा : शारदा देवी
वर्ष 2014 में जगनपुरा की रहने वाली 35 साल की शारदा देवी के पति का देहांत हो गया। इससे पहले उन्होंने कभी बाहर नौकरी के बारे में सोचा भी नहीं था। कुछ समय में ही पैसा खत्म हो गया। किसी तरह काम चलता। मुश्किलों से लड़ते-लड़ते निराशा होने लगी थी। कभी कोई काम मिल जाता तो ठीक अन्यथा रिश्तेदारों की मदद लेनी पड़ती।
आठ महीने पहले उन्होंने कढ़ाई-बुनाई का प्रशिक्षण लिया। अब एक व्यापारिक संस्था में उनकी नौकरी लग गई है। इसी महीने से नौकरी शुरू की है। शारदा ने बताया कि उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। नौकरी मिलने से एक नई ऊर्जा मिली है। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकूंगी।
एक पहल ने परखी प्रतिभा
बस्तियों की महिलाओं को प्लेटफॉर्म देने के लिए एक पहल संस्था आगे आई है। संस्था की अध्यक्ष ईबा गर्ग का कहना है कि हमने ऐसी महिलाओं को चिह्नित किया है, जिनमें प्रतिभा थी। इन महिलाओं के कुछ कर गुजरने की सोच को परखा है। इसके बाद इन्हें विभिन्न कोर्स में प्रशिक्षण प्रदान किया। साथ ही कंपनियों को प्लेसमेंट के लिए बुलाया। उन्होंने बताया कि शहर की विभिन्न बस्तियों से 40 महिलाओं ने अपने कार्य कौशल के दम पर नौकरी पाई है।