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ये धोखेबाज बिल्डर मुकदमों से भी नहीं डरते

Thu, 30 Aug 2018 11:42 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के बिल्डरों के खिलाफ शिकायतों का आना थम नहीं रहा है। सालभर में लगभग 100 केस दर्ज हो चुके हैं। जिन बिल्डरों पर 10-10 केस हैं, उनके खिलाफ अभी भी शिकायतें आ रही हैं। यह हाल तब है जबकि बिल्डरों के खिलाफ केस दर्ज करने से पुलिस बचती है। ज्यादातर मामले धोखाधड़ी और जालसाजी के हैं।

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सबसे ज्यादा केस कल्पतरू बिल्डर के खिलाफ हैं। ये मथुरा, आगरा और दिल्ली में दर्ज किए गए हैं। इसके चेयरमैन जय किशन राणा पर ईनाम घोषित किया जा चुका है। पुलिस उसे मोस्ट वांटेड बता रही है लेकिन उसे ढूंढ नहीं पा रही है। उसने लोगों का 500 करोड़ रुपया हड़प लिया है। प्लाट और फ्लैट बुक करने के नाम पर पैसा लिया और फिर फरार हो गया।

दूसरे नंबर पर निखिल होम्स के शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ केस हैं। वह जेल में बंद है लेकिन जिन लोगों का पैसा उसने हड़पा है, वे थानों के चक्कर लगा रहे हैं। शैलेंद्र पर 50 केस दर्ज हैं। प्रशासन ने उसे भूमाफिया घोषित कर दिया है लेकिन वह पैसा नहीं चुका रहा। उसकी पत्नी भी फरार है। उस पर दस हजार का इनाम है।
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गणपति, नालंदा, गायत्री, मंगलम समेत 90 फीसदी से ज्यादा रीयल एस्टेट फर्म के खिलाफ केस दर्ज हो चुके हैं। पुलिस मुकदमे लिख रही है लेकिन शिकायतें लगातार आ रही हैं। सबसे ज्यादा केस हरीपर्वत थाना में दर्ज हैं। न्यू आगरा, सिकंदरा और सदर में भी मामले दर्ज कराए गए हैं।

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दोहरी मुसीबत झेल रहे पीड़ित

बिल्डरों के धोखे के शिकार पीड़ित दोहरी मुसीबत झेल रहे हैं। एक तो उनका पैसा फंस गया है। दूसरा पुलिस सीधे केस दर्ज नहीं करती। तहरीर आने पर पहले उसकी जांच कराई जाती है। कई बार जांच के बाद भी केस नहीं होता। ऐसे में पीड़ितों को एफआईआर दर्ज कराने केलिए ही कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते हैं।

पैसे ले लिए, फ्लैट नहीं दे रहे

बिल्डरों के खिलाफ दर्ज हो रहे मामलों में मुख्यत: तीन तरह की शिकायतें हैं। एक तो फ्लैट बुक कर लिया, पैसे ले लिए, लेकिन कब्जा नहीं दिया। दूसरा, एक ही फ्लैट दो लोगों को बेच दिया। तीसरा, झूठ बोलकर बुकिंग कर ली, बाद में फ्लैट बनाए ही नहीं। एक - दो मामले ऐसे हैं जिनमें बिल्डरों ने फाइनेंस कंपनी से लोन लिया लेकिन उसे चुकाया नहीं। जो संपत्ति बंधक रखी थी, उसे बेच दिया।
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