मैनपुरी। विनियमित क्षेत्र की नई महायोजना में डूब क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं होगा। इससे डूब क्षेत्र को संशोधित कराने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को झटका लगा है। वे ईशन नदी के किनारे की जमीन पर कोई निर्माण नहीं कर पाएंगे। इसी महायोजना में नहीं आगामी सात महायोजनाओं तक लोगों को डूब क्षेत्र में निर्माण की अनुमति का इंतजार करना होगा।
शहरी क्षेत्र में निर्माण संबंधी कार्य के लिए विनियमित क्षेत्र की महायोजना को आधार माना जाता है। शासन द्वारा प्रत्येक दस वर्ष पर महायोजना तैयार की जाती है। इस बार वर्ष 2021 से 2031 के लिए महायोजना तैयार की गई है। नई महायोजना में लोगों को उम्मीद थी कि ईशन नदी के डूब क्षेत्र में बदलाव होगा। लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नई महायोजना में ईशन नदी के डूब क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं होगा। ये पूर्व महायोजना के अनुसार ही यथावत रहेगा।
यह दिया हवाला
प्रशासन ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का हवाला दिया है। उसके नियमानुसार किसी भी नदी के डूब क्षेत्र के निर्धारण में बदलाव कम से कम सौ वर्ष के अंतराल पर ही संभव है। कारण किसी भी बाढ़ के लौटने की आशंका सौ साल तक बनी रहती है। ऐसे में डूब क्षेत्र में सौ साल बाद बदलाव की अनुमति दी जा सकती है।
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वर्ष 1987 में हुआ था डूब क्षेत्र का निर्धारण
जिले में ईशन नदी के डूब क्षेत्र का निर्धारण लगभग साढ़े तीन दशक पहले हुआ था। वर्ष 1987 में ये निर्धारण किया गया था, ऐसे में कम से 2087 में ही इसे बदला जा सकेगा। इसके अलावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल अगर नियम में कोई बदलाव करता है तो भी डूब क्षेत्र के निर्धारण को बदला जा सकेगा।
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कई भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश हो चुके हैं पारित
ईशन नदी के किनारे बने चार भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश पारित हो चुके हैं। नियमों के विपरीत डूब क्षेत्र में इनका निर्माण किया गया है। उप जिलाधिकारी द्वारा दिए ध्वस्तीकरण आदेश में तीन स्कूलों के भवन और एक मैरिज होम शामिल है।
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वर्जन
एनजीटी के आदेश के अनुसार किसी भी नदी के डूब क्षेत्र का निर्धारण कम से कम सौ वर्ष बाद ही बदला जा सकता है। ऐसे में इस महायोजना में डूब क्षेत्र का निर्धारण पूर्ववत ही रहेगा। इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। -ऋषिराज, एसडीएम सदर।