आगरा। यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट के प्रायोगिक परीक्षा वाले विषयों की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए परीक्षक कम पहुंच रहे हैं। इनको विद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षा लेने के लिए कार्य मुक्त किया है। हिंदी, समाजशास्त्र जैसे विषयों के परीक्षक भी बड़ी संख्या में मूल्यांकन केंद्रों से अनुपस्थित हैं, जबकि इन विषयों में प्रायोगिक परीक्षा नहीं होती है। रविवार को पांचों मूल्यांकन केंद्रों पर 2292 परीक्षकों में से 1306 ने उपस्थिति दर्ज कराई और 986 अनुपस्थित रहे।
एक मूल्यांकन केंद्र पर इंटरमीडिएट की हिंदी विषय की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए बोर्ड स्तर से 72 परीक्षक नियुक्त किए गए हैं, इनमें से महज 11 परीक्षकों ने अभी तक उपस्थिति दर्ज कराई है। उप नियंत्रक की ओर से 12 परीक्षकों को अपने स्तर से नियुक्त किया गया है। संख्या बढ़ने के बाद भी 23 ही हुई है। इंटरमीडिएट के ही रसायन विज्ञान विषय की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए बोर्ड स्तर से 67 परीक्षक लगाए गए थे, 28 ने उपस्थिति दर्ज कराई। 17 को उप नियंत्रक स्तर से नियुक्त किया गया। 11 परीक्षक प्रायोगिक परीक्षा लेने के लिए दूसरे जिलों में चले गए हैं। रविवार को पांचों मूल्यांकन केंद्रों पर 2292 परीक्षकों में से 1306 ने उपस्थिति दर्ज कराई और 986 अनुपस्थित रहे। 236 उप प्रधान परीक्षकों में से 164 ने कॉपियों का मूल्यांकन किया और 72 अनुपस्थित रहे।
सूत्रों के अनुसार, अधिकतर विद्यालय प्रवेश प्रक्रिया की वजह से शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य के लिए मुक्त नहीं कर रहे हैं। अधिकतर वित्त विहीन विद्यालय हैं, कुछ सहायता प्राप्त विद्यालय भी यह काम कर रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार ने सहायता प्राप्त कॉलेजों को फोन करवाकर नाराजगी जाहिर की है, परीक्षकों को तत्काल रिलीव करने का निर्देश दिया है।
- 7,31,566 कॉपियां जिले के पांचों मूल्यांकन केंद्रों को आवंटित की गईं।
- 6,62,581 कॉपियां मूल्यांकन केंद्रों को प्राप्त हुई हैं।
- 3,46,105 कॉपियों का मूल्यांकन हो चुका है।
- 60,216 कॉपियों का मूल्यांकन रविवार को किया गया।