आगरा। दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध में मेडिकल जांच सबसे अहम साक्ष्य होती है। मगर प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद कई बार पीड़िता मेडिकल जांच कराने से इन्कार कर रही हैं। फिर भी पुलिस परिजन और पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपपत्र दाखिल कर रही है। इससे अदालत में साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को लाभ मिल जा रहा है।
केस - 1
थाना कागारौल में दर्ज केस के अनुसार, पीड़िता ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 15 अक्तूबर को वो खाना बनाने के लिए घर के बाड़े से लकड़ी लेने गई थी। तभी आरोपी ने मुंह बंद कर दबोच लिया। दुष्कर्म किया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली। पीड़िता को मेडिकल के लिए पुलिस अस्पताल लेकर गई जहां पीड़िता ने डॉक्टर से अपनी मेडिकल जांच कराने से मना कर दिया। उधर, आरोपी को जेल भेज दिया गया था। आरोपी की ओर से जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया। मेडिकल न होने के आधार पर जिला जज संजय कुमार मलिक ने गांव नगला परमाल निवासी आरोपी विजय कुमार को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।
केस - 2
थाना अछनेरा में दर्ज केस के अनुसार, 17 साल की किशोरी 30 अक्तूबर 2015 की सुबह खेत पर गई थी। वहां से आरोपी युवक खूबी बहला कर अपने साथ ले गया। पुलिस ने परिजन की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली। पुलिस ने किशोरी को ढूंढ लिया। इसके बाद पीड़िता को मेडिकल लिए अस्पताल लेकर गए। मगर, उसने जांच कराने से इन्कार कर दिया। उधर, आरोपी को जेल भेज दिया। पुलिस ने अपहरण, दुष्कर्म, पाॅक्सो एक्ट सहित अन्य धारा में आरोप पत्र दाखिल किया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने मेडिकल रिपोर्ट न होने के कारण आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
केस - 3
थाना बरहन में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, किशोरी के पिता ने तहरीर दी थी। बताया कि उनकी 16 वर्षीय बेटी 11 अगस्त 2020 को घर से किताब लेने बाजार गई थी। देर रात तक वापस नहीं आई। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। बाद में आरोपी को हिरासत में लिया। पीड़िता भी मिल गई। बाद में अपहरण, पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की प्राथमिकी दर्ज की गई। बाद में पीड़िता को मेडिकल के लिए लेकर गई। मगर उसने मेडिकल जांच कराने से इन्कार कर दिया। आरोपियों को जेल भेजा गया। अदालत में सुनवाई के बाद आरोपी को बरी कर दिया गया।
वर्जन
पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट अहम
दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट अहम होती है। अगर मेडिकल नहीं होगा तो केस कमजोर हो जाएगा। ऐसे स्थिति में आरोपी को लाभ मिल जाता है। नियम के अनुसार, पुलिस को तत्काल पीड़िता का मेडिकल कराना चाहिए। इसकी रिपोर्ट समय पर अदालत में प्रस्तुत करनी चाहिए।
- राधाकृष्ण गुप्ता, डीजीसी क्राइम