आगरा। बकाएदारों व बिजली चोरी का आरोप झेल रहे लोगों को राहत देने के लिए लाई गई बिजली बिल राहत योजना की मियाद शनिवार को खत्म हो गई। योजना का लक्ष्य तो बकाया वसूली कर सरकारी खजाने को भरने और डूबती बिजली कंपनियों को बचाने का था, लेकिन सिस्टम की उदासीनता और लोगों की बचने की कोशिश ने योजना को फ्लॉप कर दिया। बकाएदारों की इस फौज में औसत बकाया 30 हजार रुपये के आसपास है। हालांकि बकाया न जमा कराने पर अब उपभोक्ताओ के खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
आगरा के करीब सवा लाख बिजली उपभोक्ताओं पर करीब 395 करोड़ रुपये का बकाया था। इस बकाए को जमा कराने के लिए करीब 73 हजार उपभोक्ताओं ने योजना के तहत लाभ लेने के लिए पंजीकरण कराया। हालांकि इनमें से 22 हजार लोगों ने पंजीकरण कराने के बाद बकाया जमा ही नहीं कराया। आगरा जोन के मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी ने बताया कि मौजूदा समय में करीब 100 करोड़ रुपये ही जमा हुआ है। बताया कि इस योजना के तहत लाभ न लेने वालों से रिकवरी के लिए अब विभाग वसूली प्रक्रिया जैसे सख्त कदम उठाने के लिए बाध्य होगा। बता दें, राज्य सरकार ने लंबे समय से बिजली का बकाया रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए बंपर छूट के साथ तीन चरणों में बिजली बिल राहत योजना चलाई थी। एक दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक यह योजना क्रमबद्ध चलनी थी। पहले चरण में ब्याज में सौ फीसदी और मूलधन में 25 प्रतिशत, द्वितीय चरण जनवरी में ब्याज सौ और मूलधन 20 तथा तृतीय चरण फरवरी माह में ब्याज सौ और मूलधन में 15 प्रतिशत छूट अनुमन्य थी।