आगरा। कामकाजी और नौकरीपेशा लोगों को राहत देने के लिए शुरू की गई रविवार की रजिस्ट्री व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है। दो बार छुट्टी के दिन दफ्तर तो खुले, लेकिन एक भी बैनामा (रजिस्ट्री) दर्ज नहीं हो सका। हालात को देखते हुए विभाग इस योजना को बंद करने की तैयारी में है।
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने 19 अप्रैल से नई व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत सदर तहसील के चार सब-रजिस्ट्रार की रोस्टर के अनुसार ड्यूटी लगाई गई। 19 और 26 अप्रैल (रविवार) को अधिकारी और कर्मचारी सुबह से शाम तक कार्यालय में कुर्सियों पर बैठकर समय काटते रहे, लेकिन एक भी पक्षकार रजिस्ट्री के लिए नहीं पहुंचा।
इस व्यवस्था का सबसे नकारात्मक असर अन्य दिनों के कामकाज पर पड़ रहा है। नियमानुसार, जो स्टाफ रविवार को ड्यूटी करता है, उसे शनिवार को अवकाश देना पड़ता है। चूंकि शनिवार को रजिस्ट्री का काम सबसे अधिक रहता है, ऐसे में स्टाफ की कमी से उस दिन जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यानी एक दिन की सुविधा के फेर में मुख्य कार्य दिवस का काम भी पटरी से उतर गया है।
रजिस्ट्री प्रक्रिया की मुख्य धुरी माने जाने वाले वकील, कातिब और स्टांप वेंडर नई व्यवस्था के विरोध में हैं। वे रविवार को काम करने के लिए तैयार नहीं हैं और पिछले दो सप्ताह से लगातार हड़ताल पर हैं। उनके सहयोग के बिना आम आदमी के लिए बैनामा कराना मुमकिन नहीं है।
अगले रविवार को आखिरी मौका
3 मई को पड़ने वाले रविवार को भी यदि एक भी बैनामा नहीं हुआ, तो इसकी विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। शून्य नतीजे को देखते हुए इस व्यवस्था को जल्द ही बंद किया जा सकता है। - योगेश कुमार, सहायक महानिरीक्षक स्टांप
हमें भी चाहिए छुट्टी
रविवार विश्राम का दिन है और हमें भी परिवार के लिए एक दिन की छुट्टी चाहिए। हम इस व्यवस्था के खिलाफ हैं और हमारी हड़ताल जारी रहेगी। अगर सरकार वाकई सहूलियत देना चाहती है, तो कार्यालयों में स्टाफ बढ़ाए ताकि वर्किंग डेज में काम तेजी से हो सके। —अरविंद दुबे, महासचिव सदर तहसील बार एसोसिएशन