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यूपी में जयपुर रियासत की संपदा: आगरा में 100 बीघा, प्रयागराज में 35 एकड़; राजस्थान सरकार ने मांगी वापस

Tue, 15 Sep 2026 02:21 AM IST
आगरा ब्यूरो अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

राजस्थान सरकार ने 1952 के विलय समझौते का हवाला देते हुए आगरा समेत यूपी के चार शहरों में जयपुर रियासत की संपत्तियां अपने नाम दर्ज कराने की मांग की है। आगरा में दो कोठियों के साथ करीब 100 बीघा जमीन, सदाशिव मन:कामेश्वर मंदिर और सड़क की पट्टी का ब्योरा दिया गया है।
 
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यूपी में जयपुर रियासत की संपदा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राजस्थान सरकार ने जयपुर रियासत की उत्तर प्रदेश के चार शहरों में मौजूद संपत्तियों को वापस मांगा है। आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में रियासत की संपत्तियों का ब्योरा भी दिया है। राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव ने संपत्तियों को 1952 में हुए विलय समझौते की अधिसूचना के अनुसार राजस्थान के नाम दर्ज करने के लिए पत्र भेजा है। आगरा में जयपुर हाउस में दो कोठियां, 100 बीघा जमीन, सदाशिव मन:कामेश्वर मंदिर और सड़क की पट्टी शामिल है।
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उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के आयुक्त ने राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास के पत्र के बाद आगरा, प्रयागराज, मथुरा और वाराणसी के जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। इसमें कहा गया है कि राज्य में विलय के समय समझौते के आर्टिकल 6 (2)-सी के तहत पूर्व जयपुर रियासत की संपत्तियों के अधिकार राजस्थान राज्य को दिए जाने हैं।
संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर नगर आयुक्त, एडीए सचिव और एसडीएम सदर से डीएम ने रिपोर्ट तलब की है। इस पत्र के बाद नगर निगम और एडीए में जयपुर रियासत से जुड़े दस्तावेजों को तलाशा जा रहा है। जयपुर हाउस की जमीन पर नगर महापालिका ने 350 प्लॉट काटे थे। ऐसे में जमीन ट्रांसफर के अभिलेखों की तलाश निगम के साथ राजस्व विभाग भी कर रहा है।
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अन्य शहरों में ये संपदा
शहर संपत्तियां
प्रयागराज 35.25 एकड़ जमीन, कटरा सवाई जयसिंह
वाराणसी मोहल्ला मान मंदिर में 44 मकान, मानमंदिर घाट
मथुरा 2.16 एकड़ जमीन में जसवंतगंज धर्मशाला, छह कोठरियां


लोहामंडी थाने के सामने लगा है शिलापट्ट
खतैना रोड पर लोहामंडी थाने के सामने लगे संगमरमर के शिलापट्ट पर जयपुर रियासत का नाम लिखा है। इस पर महाराजा ऑफ जयपुर दर्ज है। इस बुर्ज से जुड़ी ककैया ईंटों की दीवार बनी है जो खतैना रोड पर प्रताप नगर मोड़ तक जाती है। कई जगह ये अब गायब हो चुकी है लेकिन इसके अवशेष अब भी मौजूद हैं। जयपुर हाउस निवासी विजय गोयल के मुताबिक प्रताप नगर चौराहे तक पुरानी ककैया ईंटों की दीवार थी जो जयपुर हाउस और प्रताप नगर को अलग करती थी। नगर महापालिका ने वर्ष 1965 में जयपुर हाउस कॉलोनी के प्लॉट काटे थे। 350 प्लॉट का आवंटन किया गया। इसमें 110 प्लॉट सहकारी समिति के जरिये दिए गए।

कोठियों में चल रहे सरकारी कार्यालय
वर्ष 1945 में कवाल शहरों (कानपुर, आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद, लखनऊ) में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट बनाए गए थे। बाद में वर्ष 1959 में नगर महापालिकाओं के गठन के बाद इनका विलय कर दिया गया। जयपुर हाउस कॉलोनी को नगर महापालिका ने बसाया। तब यहां मौजूदा एडीए कार्यालय और जीएसटी भवन बना हुआ था। इनमें एडीए कार्यालय का आर्किटेक्चर राजस्थानी शैली की हवेलियों की तरह है। जीएसटी भवन कोलोनियल यानी ब्रिटिश आर्किटेक्चर की तरह बना है। भरतपुर, धौलपुर रियासत की तरह जयपुर रियासत की जमीन और हवेली आगरा में भी थी। इसी संपत्ति के लिए मुख्य सचिव ने पत्र भेजा है। 20 साल पहले के सर्वे में आगरा में जयपुर रियासत की एक भू-पट्टी और तीन दुकानें बनी हुई हैं।


एडीए उपाध्यक्ष एम. अरुन्माैली का कहना है कि हमारे पास इससे संबंधित जानकारी नहीं है। पत्र के मुताबिक अभिलेख की तलाश कराई जाएगी। वहीं सहायक नगर आयुक्त श्रद्धा पांडेय ने बताया कि हमें पत्र प्राप्त हुआ है। पत्र के ब्योरे के मुताबिक अभिलेख तलाशे जा रहे हैं। 

 

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