भोगांव। दशलक्षण पर्व के सातवें दिन जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए संजय जैन शास्त्री ने कहा कि तप करके ही कर्मों की निर्जरा की जा सकती है। तप के प्रभाव से मोक्षमार्ग प्रशस्त होता है और व्यक्ति सुख प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि जैन मुनि तप के प्रभाव से ही स्वयं को निर्मल बनाते हैं। दुनियां की कोई संपत्ति न होकर भी मुनि के पास आत्मसंपत्ति का खजाना होता है। वे स्वयं में एक चमत्कार हैं। दुनियां सोचती है कि रोटी-कपड़ा और मकान पाकर ही खुश रहा जा सकता है लेकिन इसी दुनियां में जैन मुनि ऐसे संत हैं जो त्रण मात्र भी अपने पास नहीं रखते और आत्मिक आनंद व सुख का अनुभव करते हैं।
उन्होंने कहा कि अपनी आत्मा से मोह राग द्वेष रूपी शत्रुओं को दूर करके, हमें समस्त विकारी भावों का त्याग कर देना चाहिए। यह प्रत्येक श्रावक का कर्तव्य है कि वह औषधि आहार, अभय तथा ज्ञान का दान करें।
नलिन कुमार जैन, आशीष जैन आशू, आरसी जैन, नवीन जैन, शैंकी जैन, अमन जैन, विवोद जैन, राजीव जैन मौजूद रहे।