आगरा। गर्मी और तपिश के प्रकोप से लेडी लायल अस्पताल में बीमार नवजातों की संख्या बढ़ रही है। अस्पताल के ओपीडी में रोजाना लगभग 70 से 80 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जो सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेश दयाल ने बताया कि इस भीषण गर्मी और लू के कारण नवजात शिशुओं में उल्टी, दस्त, खांसी और तेज बुखार जैसी गंभीर समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर पहुंचने के कारण बच्चे लू का शिकार हो रहे हैं।
गर्मी के कारण बच्चों में जी मिचलाना, सिरदर्द, हाथ-पैरों में दर्द और चक्कर आने के लक्षण दिख रहे हैं। गंभीर स्थिति में बच्चा पसीने से तर हो जाता है, उसे दौरे पड़ने लगते हैं और वह बेहोश तक हो जाता है। ऐसी स्थिति में बिना समय गंवाए बच्चे को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराकर ड्रिप लगवानी चाहिए। डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में गर्मी से निपटने के लिए विशेष कोल्ड रूम बनाया गया है, जहां पुख्ता इंतजाम हैं।
बच्चों के बचाव और उपचार के उपाय
ओआरएस का सही इस्तेमाल : दस्त या डिहाइड्रेशन होने पर बच्चों को ओआरएस और जिंक की टैबलेट दें। ओआरएस के एक पैकेट को 1 लीटर साफ पानी में घोलें। इस घोल को 24 घंटे के भीतर ही बच्चे को तीन-चार बार या आवश्यकतानुसार पिलाएं। ध्यान रहे, 24 घंटे के बाद बचे हुए घोल का इस्तेमाल न करें, उसे फेंक दें।
कमरे का तापमान : नवजात शिशुओं के कमरे का तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच बनाए रखें।
धूप से बचाएं : सुबह 10 बजे के बाद और शाम 4 बजे से पहले बच्चों को लेकर तेज धूप में बिल्कुल बाहर न निकलें।
बाहर निकलते समय सावधानी : यदि किसी अत्यंत आवश्यक कार्य से बाहर निकलना भी पड़े तो बच्चे को सीधे धूप से बचाएं, उसे छाती से सटाकर रखें ताकि बाहरी गर्म हवा का सीधा थपेड़ा न लगे।
खान-पान और पहनावा : बच्चों को समय-समय पर ढंग से पानी या तरल पदार्थ पिलाते रहें। उन्हें हमेशा सूती और हल्के रंग के ढीले कपड़े ही पहनाएं।